शुक्रवार 30 दिसंबर को नोटबंदी के 50 दिन पूरे हो जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तब से बार-बार अपने भाषणों में देश की जनता से कह रहे हैं कि उन्हें 50 दिन का समय दें, इसके बाद हालात धीरे-धीरे सामान्य होने लगेंगे। लगता नहीं कि नकदी की किल्लत इतनी जल्दी दूर हो जाएगी फिर भी नोटबंदी के असर और सरकार के अगले कदम को लेकर प्रधानमंत्री नववर्ष की शुरुआत से पहले देश को संबोधित करने वाले हैं। प्रधानमंत्री पहले भी कह चुके हैं कि यह आखिरी नहीं बल्कि पहला कदम है और अगली बारी बेनामी संपत्ति रखने वालों की है। वे नकदी के प्रवाह को सुगम बनाने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर भी खासतौर पर बोल सकते हैं।

उधर, नोटबंदी की घोषणा का असर यह है कि पिछले 50 दिन में 60 लाख लोगों व कंपनियों ने लगभग सात लाख करोड़ रुपए जमा करवाए हैं। सरकार ने इन्हें आगाह करते हुए कहा है कि उन्हें बताना होगा कि यह धन कहां से आया क्योंकि केवल बैंक में जमा करवा देने से ही कालाधन वैध नहीं हो जाएगा। सूत्रों के मुताबिक सरकार किसी ईमानदार या खरे जमाकर्ता को शिकार नहीं बनाएगी लेकिन कालेधन को वैध बनाने की कोशिश कर रहे लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।

वित्तमंत्री कई बार कह चुके हैं कि कुछ लोग मानते हैं कि उनका पैसा बैंकों में आ गया है तो सफेद हो गया है। ऐसा नहीं है। हमें दो लाख, पांच लाख रुपए से अधिक जमा करवाने वालों के बारे में रोजाना जानकारी मिल रही है। हम इस जानकारी को उसी व्यक्ति के पूर्व रिकार्ड से मिला रहे हैं। सरकार को उम्मीद है कि लोग भी इस बात को समझेंगे कि खाते में जमा करवाने भर से कोई कालाधन सफेद या वैध नहीं हो जाता। इसीलिए उम्मीद है कि लोग खुद आगे आकर (कर चोरी माफी) योजना में भाग लेंगे। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें परेशानी होने वाली है।

आयकर विभाग के पास बैंकों में खाता रखने वालों और दूसरों के खातों में जमा कराने वालों, सभी का पता लगाने व पकड़ने की प्रणाली है। फिलहाल इसके राडार पर दो लाख रुपए से अधिक राशि जमा करवाने वाले 60 लाख से अधिक लोग, कंपनियां व संस्थान हैं। अधिकारी ने कहा कि अगर आप दो लाख रुपए से अधिक राशि जमा करवाने वालों की बात करते हैं तो हमारे पास पुख्ता जानकारी है कि 60 लाख से अधिक व्यक्तियों, कंपनियों व संस्थानों ने सात लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि जमा करवाई है। यह बड़ी संख्या है। हम इस पर विचार कर रहे हैं। व्यक्तियों के लिए यह संख्य 3-4 लाख करोड़ रुपए की होगी।

नोटबंदी के आलोचकों को खारिज करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को कहा कि बड़े मूल्य के पुराने नोटों को बंद करने प्रभाव उतना प्रतिकूल नहीं है जैसा कहा जा रहा था। उन्होंने यह भी कहा कि कर संग्रह, रबी की बुवाई समेत विभिन्न प्रकार की आर्थिक गतिविधियों में तीव्र वृद्धि हुई है। पुराने 500 और 1,000 रुपए के नोटों को बैंकों में जमा करने की 50 दिन की समयसीमा शुक्रवार को समाप्त होने से पहले उन्होंने कहा कि नए नोटों को चलन में डालने के काम में बहुत प्रगति हो चुकी है।

वित्त मंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में जीडीपी वृद्धि पर असर या राजस्व संग्रह में वृद्धि के कारण उनके 2017-18 के बजट में कर प्रस्तावों पर संभावित प्रभाव के बारे में कुछ भी अनुमान जताने से मना कर दिया। यह पूछे जाने पर कि नकद निकासी पर लगी सीमा कब हटेगी, उन्होंने कहा कि इस बारे में निर्णय केंद्रीय बैंक विभिन्न पक्षों से परामर्श करके करेगा। नोटबंदी से अर्थव्यवस्था व जीडीपी वृद्धि पर पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को लेकर आलोचकों की आशंका के बारे में पूछे जाने पर जेटली ने कहा- मुझे लगता है कि इस बारे में चीजें साफ है कि एक तिमाही या कुछ थोड़े समय के लिए इसका कुछ विपरीत प्रभाव पड़ेगा। लेकिन इसका इतना प्रतिकूल प्रभाव नहीं होगा जैसा कि कहा जा रहा था।

जेटली ने कहा कि प्रणाली में जो बदलाव आ रहे हैं, इसका निश्चित तौर पर मतलब है कि बैंकों के पास और धन होगा, राजस्व बढ़ेगा और संभवत: जीडीपी का आकार बड़ा और साफ होगा। यह पूछे जाने पर कि राजस्व संग्रह में वृद्धि से आने वाले बजट में कराधान पर कोई प्रभाव पड़ेगा, उन्होंने कहा- मुझे लगता है कि आपको उसके लिए इंतजार करना होगा। जब उनसे यह पूछा गया कि क्या सरकार नए नोटों को चलन में लाने की प्रक्रिया में मुद्रा की मात्रा कम करने के बारे में निर्णय करेगी, वित्तमंत्री ने कहा कि इस बारे में रिजर्व बैंक को फैसला करना है और वे निश्चित तौर बाजार की जरूरतों से निर्देशित होंगे।