शाम छह बजे जिले के मगरवारा रेलवे स्टेशन के निकट धोबिन पुलिया व श्यामाप्रसाद मुखर्जी स्टेडियम के बीच मालगाड़ी के 10 डिब्बे पटरी से नीचे पलट गए। घटना से रेल प्रशासन लगभग आधा घंटा अनजान बना रहा। जिससे घटनास्थल पर छह बजकर पैंतालीस मिनट तक कोई विभागीय अधिकारी या कर्मचारी नहीं पहुंच सका। यह बात अलग है कि उन्नाव जंक्शन से घटनास्थल की दूरी महज आठ-दस किलोमीटर है। मालगाड़ी के डिब्बे पलटने से रेल मार्ग का डाउन ट्रैक बाधित हो गया है। सूचना होने के बाद इस रूट की ट्रेनें अजगैन, सोनिक, उन्नाव, कानपुर, गंगाघाट व मगरवारा रेलवे स्टेशन पर जहां की तहां रोक दी गर्इं। पूर्व सांसद अन्नू टंडन ने कहा कि केंद्र सरकार का पूरा ध्यान नोटबंदी के भ्रष्टाचार को छिपाने में लगा हुआ है। यही कारण है कि आए दिन रेल दुर्घटनाएं देखने को मिल रही हैं। सपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने कहा कि सम्यक देखरेख न होने के कारण अब रेल यातायात भी सुरक्षित नहीं रह गया। उन्होंने कहा कि दस मिनट पूर्व इसी रूट से शताब्दी व गरीब रथ जैसी सुपर फास्ट ट्रेनों के अलावा अवध एक्सप्रेस व एलकेएम पैसेंजर भी गुजरी थी। गनीमत यह रही कि सवारी गाड़ियां सुरक्षित अपने गन्तव्य की ओर निकल गर्इं।
Goods train derails near Magarwara railway station in #Unnao; Rail Traffic disrupted. pic.twitter.com/0JtFXGc4Lz
— All India Radio News (@airnewsalerts) January 12, 2017
उत्तर रेलवे मजदूर यूनियन के जनरल सेक्रेटरी बीएन शर्मा ने कहा कि विभाग में रेलवे टेकमैप (खलासी) की डेढ़ लाख पद रिक्त हैं, जिन्हें रेल प्रशासन की अनदेखी के चलते भरा नहीं जा रहा है। केंद्र सरकार खलासी मैनों का कार्य नई तकनीक के जरिए कराने की बात कह कर अपना पल्ला झाड़ रही है। लेकिन लाख टके का सवाल यह है कि जब तक नई टेक्नॉलाजी विकसित की जाएगी। तब तक होने वाली दुर्घटनाओं के लिए जिम्मेदार किसे माना जाए।
उत्तर रेलवे मजदूर यूनियन के मंडल अध्यक्ष अनिल दुबे ने कहा कि लाखों पद रिक्त होने के कारण एक खलासी को मौजूदा समय में आठ से लेकर दस किलोमीटर दूरी की रेल लाइन संभालने की जिम्मेदारी दी जा रही है। जबकि नियमत: एक खलासी ज्यादा से ज्यादा तीन किलोमीटर रेल लाइन पर नजर रख सकता है। लेकिन विभागीय मनमानी के कारण एक ओर जहां कार्यरत खलासियों का शोषण किया जा रहा है। वहीं आए दिन रेल दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि रेलमंत्री को इस संबंध में मजदूर यूनियन कई बार ज्ञापन दे चुका है। लेकिन रेल प्रशासन ने आज तक इसका संज्ञान नहीं लिया।
