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पिछले दो दशक में बॉलीवुड के अंदाज में काफी बदलाव आया है। फिल्म के प्लॉट से लेकर सीन को फिल्माने औक पर्दे पर दिखाने तक में अब वो तौर तरीके नहीं रहे जो पहले अकसर हर फिल्म में दिख जाते थे। इसी बदलाव का असर है कि पुरानी फिल्मों के कुछ पेटेंट सीन हुआ करते थे जो अब फिल्मों से गायब हो चुके हैं। इन्हीं में से एक है ये सुहाग रात वाला सीन। पहले हर फिल्म में शादी के बाद तुरंत अगल सीन यही होता। फूलों से सजी सेज और घूंघट में बैठी दुल्हन…ओह कितना फिल्मी है
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वक्त के साथ-साथ धीरे-धीरे रामू काका भी फ्लमों से बाहर होते गए और हीरो अपने सारे काम खुद ही करने लगा।
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नकली भीड़, सुपरहीरो वाले स्टंट और हीरो-हीरोइन के रोमांस को दिखाने वाले ये स्पेशल इफेक्ट भी अब बीते जमाने की बात हो गए हैं।
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जैसे-जैसे फिल्मों से बस्ती और बस्ती वाले गुंडे गायब हुए, बस्ती की मस्ती और गाने भी बाहर होते गए। अब ये गाने पब और डिस्को में फिल्माए जाते हैं।
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जबसे हीरो ही नेगेटिव रोल करने लगे तबसे खूंखार विलेन के इस तरह के हेयर स्टाइल भी दिखने गायब हो गए।
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पुरानी फिल्मों में मरे हुए कैरेक्टर का भी अहम रोल होता था, कई कस्में और वादे तो इन्हें देखकर ही किए जाते थे, लेकिन डिजिटल एज में इसे जगह नहीं मिली।
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एपिक स्लो मोशन रोमैंटिक रन भी अब नहीं दिखती।
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पार्टी में पियानो बजाकर कोई सैड नंबर गाने वाले भी अब पार्टी से बाहर हैं। इसकी जगह आइटम नंबर्स ने लेली है।
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विलेन का टेरर दिखाने के लिए अब भूसे से भरी जानवरों की खाल इस्तेमाल नहीं होती, अब के विलेन काफी हाईटेक हो गए हैं।
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फिल्म में गाना और सपने में पहुंच जाना फिर बड़े-बड़े प्रॉप्स के साथ डांस, सोचते ही जीतेंद्र और गोविंदा के गाने याद आने लगते हैं।