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Film nikah controversy: तलाक के बाद महिलाओं की मनोस्थिति पर बनी फिल्म ‘निकाह’ एक समय विवादों में घिर गई थी। फिल्म में दिखाया गया था कि तीन बार तलाक बोलने से किस तरह बसे बसाए घर बिखर जाते हैं। उन दिनों फिल्म का सब्जेक्ट और पोस्टर विवाद का कारण बन रहा था। फिल्म रिलीज होने के ठीक एक दिन पहले आनन-फानन में रातों रात मौलवियों फिल्म दिखाई गई थी। क्यों? आइए बताएं। (Photo: Social Media)
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फिल्म की राइटर अचला नागर ने निकाह का नाम पहले तलाक, तलाक, तलाक रखा था, लेकिन इस नाम से पहले से फिल्म रजिस्टर थी। इसलिए इसका नाम बीआर चोपड़ा ने बदल कर निकाह रख दिया था। (Photo: Social Media)
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अचला नागर ने बीबीसी को बताया था कि, जब निकाह औरत की मर्ज़ी के बिना नहीं हो सकता तो तलाक क्यों हो सकता हैं? इसी सवाल को वह फिल्म के माध्यम से उठाया था। (Photo: Social Media)
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1982 में आई इस फिल्म में पाकिस्तानी अदाकारा सलमा आगा के साथ राज बब्बर, दीपक पराशर भी थे। अचला ने बताया था कि फिल्म रिलीज़ होने के चार दिन पहले ही किसी ने मुस्लिम बहुल इलाके भिंडी बाज़ार में पोस्टर लगा दिए थे। (Photo: Social Media)
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वह बताती हैं कि, लोगों ने फैला दिया था कि फिल्म में मज़हब के खिलाफ बातें हैं। फिल्म के खिलाफ फतवे जारी कर दिए गए थे। तब रातोंरात विरोध करने वाले मौलवियों को बुलाकर फ़िल्म दिखाई गई थी ताकि फिल्म रिलीज हो सके। इसके बाद मामला शांत हुआ और थियेटर में फिल्म रिलीज हो सकी। (Photo: Social Media)
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फ़िल्म समीक्षक और वरिष्ठ पत्रकार ज़िया-उस-सलाम ने बताया था कि उन दिनों भारत ही नहीं पाकिस्तान में भी फिल्म को लेकर प्रदर्शन हुए थे। कुछ मौलानाओं का कहना था कि इसमें तलाक तो दिखाया, लेकिन हलाला के बारे में नहीं बताया गया था। (Photo: Social Media)