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14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में हुए आतंकी हमले के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की स्थिति है। इस हमले में देश के 42 जवान शहीद हुए थे। इसके बाद बारत ने बालाकोट स्थित जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शिविर को निशाना बनाया था। इस अभियान में भारतीय वायुसेना द्वारा एयर स्ट्राइक की गई। 26 फरवरी को भारतीय वायुसेना ने 12 मिराज 2000 लड़ाकू विमान से इस अभियान को अंजाम दिया। इसमें 350 आतंकी के मारे जाने का दावा किया गया है। सेना के इस विमान को फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट ने बनाया है। लेकिन आपको बता दें कि सेना के पास मिराज की तरह और भी तमाम विध्वंसक हथियार हैं जो दुश्मन को भारत के आगे घुटने टेकने पर मजबूर कर सकते हैं। यहां हम आपको देश के उन 10 शक्तिशाली अचूक हथियारों के बारे में बता रहे हैं जिनके पराक्रम से दुश्मन भी खौफ खाता है। (All Pics-PTI)
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Su-30Mki: Su-30Mki बीते साल ही भारतीय वायुसेना के बेड़े में सुखोई- 30 को शामिल किया गया है। इस लड़ाकू विमान को रूस में बनाया गया है। सुखोई दुनिया के शक्तिशाली विमानों में से एक है। इस विमान की लंबाई 21.93 मीटर और चौड़ाई 14.7 मीटर है, जिसका वजन 18 हजार चार सौ किलोग्राम है। हथियार के साथ इसका वजन 26 हजार किलोग्राम तक हो सकता है। इसकी अधिकतम रफ्तार 2120 किमी प्रति घंटे है। विमान में दो शक्तिशाली इंजन हैं। यह विमान उड़ात भरते समय जमीं से हवा में और हवा से हवा में भी निशाना साधने में सक्षम है। यह तीन हजार किमी तक की गहराई तक निशाना साधकर दुश्मन पर वार कर सकता है। यह 21 वी सेंचुरी का एयरक्राफ्ट है।
BrahMos Missile: ब्रह्मोस मिसाइल का भारत और रूस मिलकर विकास कर रहे हैं। यह मिसाइल एक साथ तमाम जगह निशाना साधने में सक्षम है। इस मल्टी मिशन मिसाइल की मारक क्षमता 290 किलोमीटर की है और इसकी गति 208 मैक है। यह मिसाइल जमीन, समुद्र, उप समुद्र और आकाश से समुद्र और जमीन पर स्थित टारगेट पर मार कर सकती है। इसके अलावा यह मिसाइल पहाड़ी में छुपे दुश्मनों पर भी वार कर सकती है। ब्रह्मोस के एयर फॉर्मेट को भारतीय वायु सेना के सुखोई-30 एमकेआई फाइटर पर उड़ान टेस्ट के लिए तैयार किया जा रहा है। जानकारी के लिए आपको बता दें कि इंडियन नेवी ने अपनी कई वॉरशिप पर इस मिसाइल को तैनात किया है, जिसमें रडार की पकड़ में न आने वाले पोत भी शामिल हैं। नेवी के अलावा इंडियन एयरफोर्स भी इस क्रूज मिसाइल को अपने हेवी ड्यूटी फाइटर सुखोई-30 MKI पर लगाने जा रही है। सेना में ब्रह्मोस ब्लॉक-1 और ब्लॉक-2 रेजिमेंट में शामिल हो चुकी है। T-90S Bheeshma: भीष्म भारतीय सेना का यह सबसे ताकतवर टैंक है। इसे केमिकल या रेडियोएक्टिव हमले से नष्ट नहीं किया जा सकता है। यह पांच किलो मीटर की दूरी तक वार कर सकता है। इस टैंक की सबसे खासियत है कि इस पर किसी भी तरह के कैमिकल या बायोलॉजिकल हमले और रेडियोएक्टिव हमले कोई असर नहीं होता। दुश्मन भीष्म पर कितना ही बमबारी का प्रहार करे लेकिन इस पर सवार सैनिक सुरक्षित रहेंगे। अगर कोई इस टैंक पर बमबारी भी करता है तो बम इस टैंक से टकराकर कमजोर पड़ जाते हैं। 48 टन वजनी टैंक एक 125 एमएम की स्मूथबोर गन और एक 12.7 एमएम की मशीनगन है जिसे टैंक के अंदर बैठा कमांडर रिमोट से निंयत्रित कर सकता है। -
INS Chakra2: परमाणु क्षमता युक्त पनडुब्बी आईएएनएस चक्र-2 इंडियन नेवी का बड़ा हथियार है। इसकी खासियत है कि ये पानी में 600 मीटर तक गहराई में रह सकती है। इसकी अधिकतम गति 30 समुद्री मील है। यह पनडुब्बी आठ टॉरपीडो से लैस है। भारतीय नौसेना ने रूस से इसे एक अरब डॉलर के सौदे पर 10 साल के लिए लिया गया है। यह पनडुबब्बी भारत ने रूस से एक अरब डॉलर पर 10 साल के लिए ली है।
INS Vikramaditya: 44,500 टन वजनी आईएनएस विक्रमादित्य को साल 2013 में इंडियन नेवी में शामिल किया गया है। नेवी के इस युद्धपोत की लंबाई 283.1 मीटर और ऊंचाई 60.0 मीटर है। इसपर डेकों की संख्या 22 है। इसका पूरा एरिया तीन फुटबाल मैदान के बराबर है। 22 फ्लोर वाला यह युद्धपोत अपने साथ 1600 लोगों को ले जाने की क्षमता रखता है। यह 32 नॉट (59 किमी/घंटा) की रफ्तार से चलता है और 100 दिन तक लगातार समुद्र में रह सकता है। आईएनएस विक्रमादित्य 24 मिग -29K/KUB का भार ढोने में सक्षम है। इस पोत का नाम ऐडमिरल गोर्शकोव था जिसका नाम बाद में बदलकर विक्रमादित्य कर दिया गया। P-8i Neptune: पी 81 नेप्ट्यून विमान महासागर से सटी सीमा पर दुश्मनों के प्रहार को रोकने में सहायक है। यह विमान अपनी मजबूती और सेंसर सूट के लिए खास माना जाता है। पी-81 पर लंबी दूरी का रडार भी है और इसपर पनडुब्बियों को खोज निकालने के लिए एक खास तरह का सेंसर लगा है। यह विमान बेस से 2 हजार किलोमीटर तक के मिशन पर यह 4 घंटे तक उड़ान भर सकता है और लंबे समय तक आसमान में पॉजीशन ले सकता है। यह अपने साथ 120 सोनोबॉयज के साथ 6-8 Mk-54 टारपीडो और अपने पंखों पर 4 हार्पून मिसाइल का भार ढोने की क्षमता भी रखता है। एएडी 250 किमी से अधिक की रेंज तक हमला कर दुश्मन के वार को रोक सकता है। -
Pinaka MLRS: पिनाका रॉकेट इसी साल सेना के दस्ते में शामिल हुआ है। इसे रक्षा अनुसंधान, विकास संगठन (DRDO) और भारतीय सेना द्वारा विकसित किया। यह एक यह मल्टी-बैरल रॉकेट लांचर है। 40 किमी रेंज तक गोले दागने वाला यह देसी हथियार एक साथ 12 रॉकेट दाग सकता है। ये 65 किमी दूर तक वार करने में सक्षम है। युद्ध की स्थिति में यह अपने आगे दुश्मनों को टिकने भी नहीं देगा।
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NaMiCa (Nag Missile Carrier): नामिका मिसाइल ऊंचाई से हमला करने और सभी मौसम में फायर करने की सक्षम है। इसका 42 किलो के इस मिसाइल को आकाश से जमीन पर हमला करने के लिए हेलीकॉप्टर पर लगाया जा सकता है। नाग मिसाइल की खासियत यह है कि यह हर तरह के मौसम में अपना अचूक प्रहार कर सकती है। हमला करने के लिए 42 किग्रा वजन की इस मिसाइल को हवा से जमीन पर मार करने के लिए हल्के वजन के हेलीकॉप्टर में भी लगाया जा सकता है। इन्फैन्ट्री कॉम्बेट व्हीकल बीएमपी-2 नमिका से भी इस मिसाइल को दागा जा सकेगा।
Su-30Mki: Su-30Mki बीते साल ही भारतीय वायुसेना के बेड़े में सुखोई- 30 को शामिल किया गया है। इस लड़ाकू विमान को रूस में बनाया गया है। सुखोई दुनिया के शक्तिशाली विमानों में से एक है। इस विमान की लंबाई 21.93 मीटर और चौड़ाई 14.7 मीटर है, जिसका वजन 18 हजार चार सौ किलोग्राम है। हथियार के साथ इसका वजन 26 हजार किलोग्राम तक हो सकता है। इसकी अधिकतम रफ्तार 2120 किमी प्रति घंटे है। विमान में दो शक्तिशाली इंजन हैं। यह विमान उड़ात भरते समय जमीं से हवा में और हवा से हवा में भी निशाना साधने में सक्षम है। यह तीन हजार किमी तक की गहराई तक निशाना साधकर दुश्मन पर वार कर सकता है। यह 21 वी सेंचुरी का एयरक्राफ्ट है। PAD/ AAD Ballistic Missile Defense (BMD) System: भारतीय बीएमडी प्रोग्राम तब चर्चा में आया जब पहली बार इसे लेकर घोषणा की गई। एक शॉर्ट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल पर इसका परीक्षण किया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक शॉर्ट नोटिस पर इसे देश के प्रमुख शहरों की सुरक्षा में तैनात किया जा सकता है। इस सिस्टम में ग्रीन पीन रडार के फॉर्म के साथ दो इंटरसेप्टर मिसाइल, PAD (पृथ्वी एयर डिफेंस) और AAD (एडवांस एयर डिफेंस) शामिल हैं। PAD 2 हजार किमी दूरी तक दुश्मन पर प्रहार करने में सक्षम है। जबकि AAD 250+ किमी की रेंज तक इस्तेमाल की जा सकती है। दोनों ही मिसाइलों को इनरशियल नेविगेशन सिस्टम (INS) के जरिए गाइड किया गया। -
Phalcon AWACS: ‘एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम’ (अवॉक्स) किसी भी मौसम में खतरे के रूप में आने वाली क्रूज मिसाइलों और विमानों का आसमान में लगभग 400 किलोमीटर ऊंचाई से खोजने में सक्षम हैं। इसे इस्राइली तकनीक से निर्मित किया गयाा है। इस प्रणाली के तहत कम ऊंचाई पर उड़ने वाली ऐसी चीजों का भी पता लगाया जा सकता है, जो सामान्य राडारों की पकड़ में नहीं आ पाती। अवॉक्स को विमान आईएल-76 पर लगाया गया है।