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स्पाइडर सिल्क, यानी मकड़ी का रेशम, अपनी अद्भुत ताकत के लिए जाना जाता है। यह इंसानी बाल से भी पतला होता है, लेकिन वही जाल वजन उठाने की क्षमता में स्टील से पांच गुना मजबूत होता है। (Photo Source: Pexels)
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हाल ही में वैज्ञानिकों ने ब्राउन रीक्लूस मकड़ी (Loxosceles reclusa) के सिल्क का अध्ययन किया और इसके ताकत के रहस्य को समझा। (Photo Source: Pexels)
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एक एटॉमिक फोर्स माइक्रोस्कोप की मदद से पता चला कि मकड़ी का सिल्क हजारों नैनो स्ट्रैंड्स या नैनो फाइब्रिल्स से बना होता है, जो समानांतर में चलते हैं। हर नैनोस्ट्रैंड प्रोटीन से बना होता है और इसका व्यास इंसानी बाल की तुलना में लाखों गुना पतला होता है। (Photo Source: Pexels)
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वैज्ञानिकों ने यह खोज की कि यह सिल्क कोई एकल धागा नहीं बल्कि छोटे-छोटे केबल्स का एक समूह है। इन नैनो फाइब्रिल्स की लंबाई उनकी चौड़ाई से कम से कम 50 गुना अधिक होती है। (Photo Source: Pexels)
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इसके साथ मकड़ी के सिल्क में खास लूपिंग तकनीक इसे और भी मजबूत बनाती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ब्राउन रीक्लूस मकड़ी का सिल्क इतना मजबूत इसलिए है क्योंकि इसके छोटे नैनो फाइब्रिल्स सामूहिक रूप से बड़ी ताकत प्रदान करते हैं। (Photo Source: Pexels)
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अन्य मकड़ियों के सिल्क का ढांचा अलग होता है, जो विशेष रूप से जमीन पर शिकार पकड़ने के लिए अनुकूलित होता है। इस खोज के आधार पर शोधकर्ताओं ने एक स्ट्रक्चरल मॉडल विकसित किया है, जो भविष्य में इंसानी निर्मित सुपर स्ट्रॉन्ग मटेरियल्स बनाने में मदद कर सकता है। (Photo Source: Pexels)
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पहले भी आर्टिफिशियल मकड़ी का रेशम बनाने के प्रयास किए जा चुके हैं, जिनका इस्तेमाल बाइक हेलमेट बनाने से लेकर जख्म भरने तक किया जा सकता है। (Photo Source: Pexels)
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नेशनल साइंस फाउंडेशन के मोहन श्रीनिवासाराव के अनुसार, “ब्राउन रीक्लूस सिल्क की आणविक स्तर पर समझ हमें न केवल प्राकृतिक ताकतवर मटेरियल्स के रहस्यों से अवगत कराती है, बल्कि अन्य सिंथेटिक मटेरियल्स के निर्माण की दिशा भी दिखाती है।” बता दें, यह अध्ययन ACS मैक्रो लेटर्स में प्रकाशित हुआ है और यह हमें प्रकृति की अद्भुत निर्माण कला को समझने में मदद करता है। (Photo Source: Pexels)
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