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RJD supremo Lalu Prasad Yadav: राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) बिहार की राजनीति में चहेते राजनीतिज्ञ के रूप में जाने जाते हैं। लालू के बोलने का तरीका और हेयरस्टाइल उनकी यूएसपी मानी जाती है। साधारण से परिवार में जन्मे लालू ने राजनीतिक गलियारे तक पहुंचे के लिए काफी संघर्ष किया है। लालू की बॉयोग्राफी 'गोपालगंज से रायसीना' (Gopalganj to Raisina) में लालू प्रसाद ने अपने जीवन से जुड़े कई पहलुओं के बारे में बताया है। इसी किताब में लालू ने भूतों का एक किस्सा भी सुनाया है। उन्होंने खुद बताया है कि भूतों के बीच फंसने पर उनकी जान कैसे बची थी। (All Photos: social Media)
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लालू ने किताब में बताया है कि, उनके पिता जी के तीन भाई थे। उनके एक चाचा सूधन राय ने शादी नहीं की थी और वह संन्यासी हो गए थे।
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उनके चाचा काली माई और स्थानीय देवता बरम बाबा की पूजा करते थे और भूत भी भगाया करते थे। लालू बताते हैं कि एक बार उनका भी भूतों से सामना हो गया था।
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लालू ने बताया था कि उनके घर के पीछे एक बड़े से पीपल के पेड़ के नीचे बरम बाबा का ठिकाना था। वह छोटे थे और गर्मी में किसी पूर्णिमा की रात बरम बाबा के डेरे पर खाना खाने के बाद वह लोकगीत सुन रहे थे और गीत सुनते-सुनते बरम बाबा के नजदीक गेहूं के पुआल के ढेर पर वह सो गए थे।
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रात में उनकी नींद तब खुली जब उनके दो दोस्त उन्हें जगाए और अपने साथ चलने के लिए कहने लगे। नींद में वह उठे और दोस्तों के साथ वह गांव के बाहर स्थित श्मशान की ओर जाने लगें।
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रास्ते में वह खेत में लघुशंका के लिए बैठे थे तभी गांव के एक बुजुर्ग तपेसर बाबा खैनी मलते वहां से गुजरे और उन्होंने पूछा, 'कौन है रे?' तब उन्होनें कहा, 'हम हैं ललुआ'। यह सुनकर बाबा ने कहा, कहां जा रहे हो, उठो घर जाओ।
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बाबा की आवाज सुनते ही उनके दोस्त गायब हो चुके थे। अगले दिन लालू ने जब अपने दोस्त से घटना के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि वह तो रात में घर पर सो रहे थे।
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इसके बाद उन्होंने तपेसर बाबा से पूछा। उन्होंने भी कहा कि वह घर पर थे। रात में कहीं नहीं निकले। इसके बाद लालू समझ गए कि वह भूत थे और बरम बाबा ने तपेसर बाबा का रूप लेकर उन्हें बचाया था।