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National War Memorial: देश को सोमवार के दिन (25 फरवरी) को पहला नैशनल वॉर मेमोरियल मिल गया है। । प्रधानमंत्री नरेंद्री मोदी ने शहीदों की याद में बने स्मारक का उद्घाटन किया है। समारोह के दौरान पीएम मोदी ने कहा, हमारी सेना दुनिया की सबसे ताकतवर सेना है, सैनिकों ने हमेशा हर युद्ध को अपने ऊपर लिया और उसका मुंहतोड़ जवाब भी दिया। सैनिकों की वीरता का बखान करते हुए पीएम मोदी ने पुलवामा के शहीदों को भी नमन किया। पीएम के संबोधन से पहले रक्षामंत्री निर्मला सीतारण ने पूर्व सैनिकों की मौजूदगी में कहा, देश को राष्ट्रीय युद्ध स्मारक समर्पित किया गया और इस दिन के हम सभी ने काफी लंबा इंतजार किया है। इंडिया गेट के नजदीक स्थित यह वो राष्ट्रीय युद्ध स्मारक है जो आपको अब तक लड़े गए सभी युद्धों की शौर्य गाथा की कहानियां सुनाएगा। यह स्मारक 40 एकड़ की भूमि पर बना हुआ है। (All Pics- PMO twitter)
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176 करोड़ रुपए की लागत से बने इस स्मारक में सन 1947 के बाद हुए युद्धों में शहीद 25000 से ज्यादा सैनिकों के नाम लिखे गए हैं।
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छह भुजाओं के आकार निर्मित इस मेमोरियल के केंद्र में 15 मीटर ऊंचा स्मारक स्तंभ बनाया गया है।
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स्मारक में शहीदों के नाम के अलावा 21 परमवीर चक्र विजेताओं की मूर्तियां भी बनाई गई हैं।
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स्मारक चार चक्रों पर केंद्रित है- अमर चक्र, वीरता चक्र, त्याग चक्र, रक्षक चक्र। इसमें थल सेना, वायुसेना और नौसेना के शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी गई है। शहीदों के नाम दीवार की ईंटों में अंकित किए गए हैं।
स्मारक का निचला भाग इंडिया गेट की अमर जवान ज्योति की तरह नजर आता है। मेमोरियल की अमर ज्योति भी हमेशा जलती रहती है। -
रात के समय इस स्मारक की खूबसूरत और दोगुनी बढ़ जाती है।
नई दिल्ली के टूरिस्ट प्लेस की लिस्ट में अब इस एक और नेशनल हेरिटेज का नाम जुड़ चुका है। नेशनल वॉर मेमोरियल के चारों ओर शानदार लाइटें भी लगाई गई हैं। विजय चौक से इंडिया गेट और नेशनल वॉर मेमोरियल के मनोरम नजारे के दृश्य देखे जा सकते हैं। -
इस स्मारक में हर शाम सैन्य बैंड के साथ शहीदों को सलामी दी जाती है।
दिलचस्प ये है कि इस स्मारक में पर्यटकों के लिए प्रवेश निशुल्क रहेगा। यहां हर सप्ताह रविवार को चेंज ऑफ गार्ड सेरेमनी देखने का मौका मिलेगा। जानकारी के लिए आपको बता दें कि शहीदों की याद में स्मारक और संग्रहालय बनाने पर विचार सबसे पहले साल 1968 में किया गया था। साल 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के कुछ ही माह बाद 2015 में इस स्मारक के निर्माण की अनुपति दे दी गई थी। इसके बाद से ही इंडिया गेट के पास इसका निर्माण शुरू किया गया और अब यह पूरी तरह से बनकर तैयार है।