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कोरोना वायरस (Coronavirus) से फैली महामारी ने भारत में भी बेहद क्रूर रूप दिखाया है। 22 अप्रैल तक इससे संक्रमित होने वालों की संख्या करीब 20 हजार हो चुकी है। वहीं छह सौ से ज्यादा लोगों की जान भी जा चुकी है। इस वायरस पर नियंत्रण के लिए 25 मार्च से 3 मई तक के लिए देशव्यापी लॉकडाउन (Lockdown) किया गया है। इस लॉकडाउन का सबसे बुरा असर बड़े शहरों में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों (Migrant Labours) पर पड़ा है। लॉकडाउन के कारण उनकी नौकरी चली गई, खाने को कुछ नहीं, ऐसे में उनके पास कोई साधन न मिलने पर पैदल ही घर जाने का चारा बचा था। ऐसे ही हजारों बदनसीब मजदूरों में से एक थे दयाराम कुश्वाहा। दयाराम पैदल ही 500 किमी का सफर तय कर बुंदेलखंड में अपने गांव पहुंचे हैं।
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दया राम 26 मार्च को दिल्ली से पैदल ही परिवार के साथ घर के लिए निकल पड़े थे। दयाराम के 5 साल का बेटे शिवम ने पिता के कंधे पर बैठ ये सफर तय किया।
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दयाराम की ये तस्वीर काफी वायरल हुई थी। तस्वीर में दयाराम के चेहरे से साफ झलक रहा था कि वो किन हालातों के से गुजर रहे हैं।
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रास्ते में गर्मी, थकान और भूख की चुनौतियों का किसी तरह से सामना करते हुए दयाराम ने अपना सफर पूरा किया।
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फिलहाल दयाराम अपने गांव पहुंच चुके हैं। गांव में भी रोजगार का संकट तो है ही फिर भी वह यहां आकर खुश हैं।
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रॉयटर्स के साथ बातचीत में दयाराम ने बताया कि ऐसा नहीं है कि मुझे दिल्ली से प्यार है। मुझे तो जिंदा रहने के लिए पैसा चाहिए। अगर वह मुझपर हो तो मैं यहीं रहूं। यह मेरा घर है।
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बेटे के घर पहुंचने से उनके माता-पिता ने भी राहत की सांस ली है। उन्हें इस बात की तसल्ली है कि इस बुरे दौर में पूरा परिवार साथ है।
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लेटेस्ट तस्वीरों में दयाराम के चेहरे पर चिंता की लकीरें तो हैं लेकिन शायद भूख से मर जाने का खौफ अब गायब हो चुका है।
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दयाराम गांव में खेतों में मजदूरी कर रहे हैं। दयाराम का कहना है कि पैसे तो नहीं मिल रहे लेकिन खाने के लिए अनाज मिल जा रहा है।

ये दयाराम का घर है। (All Photos: Reuters) <a href="https://www.jansatta.com/photos/news-gallery/delhi-migrants-living-under-flyover-near-yamuna-ghat-cm-arvind-kejriwal-shift-them-in-shelter-homes/1379442/ “>‘ना छत ना बिछौना ना खाना, जानवरों से भी बदतर हालात’, सरकारी दावों की धज्जियां उड़ाती तस्वीरें