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उत्तर प्रदेश के मथुरा से बीजेपी सांसद और अभिनेत्री हेमा मालिनी ने मंगलवार को पटना पहुंकर अपनी परफोर्मेंस से हर किसी का मन मोह लिया। पटना के श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल में हेमा मालिनी ने द्रौपदी की भूमिका को लेकर परफोर्मेंस किया। 12 साल बाद बतौर आर्टिस्ट मीरा की भूमिका अदा करने के बाद रंगमंच पर परफोर्मेंस करने वाली हेमा मालिनी ने एक खास बातचीत में कहा कि बिहार आना उन्हें काफी पसंद है और खास कर पटना के लोग उनके अच्छे दोस्त हैं। उन्होंने कहा बिहार यहां के लोग, यहां के कलाकार, संस्कृति सब काफी अच्छे हैं। इस दौरान उन्होंने बिहार के लोगों के प्रति अपने प्यार का भी इजहार बयां किया। उन्होंने कहा कि बिहार के लोगों का प्यार ही है जिसने मुझे बतौर अदाकारा फिर से पटना परफार्मेंस करने को वापस बुलाया और मैं यहां आ कर काफी अच्छा फील कर रही हूं।
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इस दौरान आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव और उनके दोनों पुत्र डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव और हेल्थ मिनिस्टर तेज प्रताप सिंह यादव मौजूद रहे। लालू और उनके दोनों बेटों ने भी हेमा के प्रति अपना प्रेम बयां किया। लालू ने हेमा से कहा कि हम आपको इतना पसंद करते हैं कि हमने अपनी बेटी की नाम भी हेमा रख दिया। आपको बता दें कि इससे पहले बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने बिहार की सड़कों की तुलना हेमा मालिनी के गाल से की थी। लालू ने कहा था, हम बिहार की सड़कों को हेमा मालिनी के गालों जितना मुलायम बना देंगे।
वहीं बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने भी कहा था ‘बिहार की सड़कें हेमा मालिनी के गाल की तरह होंगी।’ उन्होंने कहा कि उनके पिता लालू प्रसाद ने जब सड़कों को हेमामालिनी के गाल की तरह बनाने की बात कही थी, तब मजाक उड़ाया गया था। लेकिन, उनकी बात सही साबित होगी। जल्द ही बिहार की सड़कें अच्छी बनेंगी। -
बिहार में होने वाले बदलाव के बारे में सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि पहले की तुलना में बिहार में बदलाव हुआ है और मैं चाहती हूं की देश के साथ बिहार भी विकास करें।
हेमा से जब हिन्दी फिल्मों के बदलते स्वरूप के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि बदले समय के साथ सिनेमा और किरदारों में बदलाव आना लाजमी है यही कारण है कि आज फिल्मों से बसंती जैसे किरदारों की जगह नए किरदार आ रहे हैं। -
उन्होंने कहा कि 12 साल पहले पटना के रंगमंच पर मीरा का किरदार निभाने के बाद अब मैं बतौर द्रौपदी अपने एक्ट में किरदार निभाने आयी हूं। गौरतलब है कि महाभारत की कहानी पूरी द्रौपदी के चीरहरण को लेकर ही निर्मित की गई है। यहीं से कौरवों और पांडवों के बीच महाभारत युद्ध हुआ था, जिसमें धर्म की विजय और अधर्म की पराजय हुई थी।