-

मुंबई, जहां हर कोई अपने सपनों को साकार करने आता है लेकिन वहीं दूसरी ओर इससे सटे इलाकों में तमाम लोग जिल्लत की जिंगदी भी जी रहे हैं। जहां लोगों को दो वक्त की रोटी तो मिल जाती है लेकिन प्यास बुझाने के लिए पानी की बूंद के लिए तरसना पड़ता है। यहां बात हो रही है मुंबई से सटे पालघर जिले के ग्रामीण इलाकों को लेकर, जहां पर लोगों को पीने के पानी को हासिल करने के लिए एक असहनीय दर्द से होकर गुजरना पड़ रहा है। इस क्षेत्र भर में लोगों के बीच पानी की भारी किल्लत नजर आ रही है। शहर के लोग भी महंगी मिनरल वाटर की खरीद को लेकर परेशान हैं लेकिन गरीब ग्रामीणों की जिंदगी बेहद ही दयनीय हो गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादातर कुएं, नदी, तालाबों का पानी तल से गायब है। यहां के लोग पानी की बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। लोगों को तमाम किलोमीटर दूर जाकर अपनी प्यास बुझानी पड़ रही है। आर्थिक स्थिति से कमजोर लोगों को पानी की खरीद करना बेहद बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। यहां हम आपको पालघर के लोगों की वो तस्वीरें दिखा रहे हैं जिसमें लोग मुश्किल हालातों में टैंकर के पानी के लिए एक दूसरे के साथ ढक्का-मुक्की कर रहे हैं। (All Pics- PTI)
-
जहां पानी की सप्लाई है वहां तो लोग टैंकर के दूषित पानी को शायद ही पीते हों लेकिन पालघर के ग्रामीण इलाके की जनता के लिए यह पानी मानो अमृत के समान हो। बात अगर जिले के शहरी क्षेत्रों की करें तो वहां भी जलापूर्ति की बड़ी समस्या देखी जा रही है।
-
लंबे समय तक यहां के लोगों को पानी के लिए बेसब्री से इंतजार करना पड़ता है। जैसे ही टैंकर आता तो लोगों की लंबी कतारों पानी के लिए खड़े हो जाते हैं। तमाम दफा तो एक दूसरे के लिए साथ लड़ने भी लगते हैं।
-
किसानों की आत्महत्या पर प्रतीकात्मक तस्वीर
पानी के लिए तरसते लोग मानसून का भी लंबे समय तक इंतजार करते हैं, ताकि कुछ समय के लिए इन्हें राहत मिल सके। पानी के लिए महिलाएं अलसुबह उठकर गर्मी हो या सर्दी दो से तीन किमी दूर जाकर पानी ढोती हैं।कई गांवो के लोग लीकेज पानी से भी अपनी प्यास बुझा रहे हैं। -
कई गांवो के लोग लीकेज पानी से भी अपनी प्यास बुझा रहे हैं।