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Lok Sabha Elections Results 2019: साल 2014 के बाद एक बार फिर से प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र में मोदी सरकार बनने जा रही है। भाजपा संसदीय बोर्ड ने गुरुवार (23 मई) को एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की गयी और पार्टी के एजेंडे का समर्थन करने के लिए लोगों का आभार व्यक्त किया गया। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में लगातार दूसरी बार 'प्रचंड मोदी लहर' पर सवार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) रिकॉर्ड सीटों के साथ केंद्र की सत्ता पर काबिज होने जा रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी के सभी नवनिर्वाचित सांसद शनिवार को मोदी को अपना नेता चुनने के लिए बैठक करेंगे, जिसके बाद वह राष्ट्रपति से मिलकर नई सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। मोदी लहर के चलते देश के तमाम राज्यों में एनडीए के उम्मीदवारों ने भारी मतों से अपने-अपने क्षेत्र में जीत हासिल की है। वहीं दूसरी ओर वे उम्मीदवार भी फ्लॉप साबित हुए जिन्होंने अपना दल छोड़कर दूसरी पार्टियों का दामन थामा था। कुल मिलाकर इस देश के ज्यादातर राज्यों में मोदी लहर के चलते उम्मीदवारों का दबदबा कायम रहा। मोदी की आंधी में इस साल विपक्षी पार्टियों के नामी चेहरों के उम्मीदवार के भी छक्के छुड़ गए हैं। यहां हम ऐसे ही उम्मीदवारों के बारे में बता रहे हैं जिनका परिवार राजनीति में ऊंचा मुकाम रखता है। लेकिन मोदी लहर में बड़े नाम और विरासत में मिला जनाधार भी इन्हें हार से नहीं बचा सका। जानिए कौन-कौन वे नामचीन परिवार से ताल्लुक रखने वाले उम्मीदवार।

साल 2014 में मुलायम सिंह के परिवार के 5 सदस्यों ने यूपी में चुनाव जीता था। इस साल यादव परिवार में अखिलेश और मुलायम सिंह यादव ने तो अपनी सीट बचा ली लेकिन डिंपल यादव के हाथ से कन्नौज की सीट बीजेपी के हाथ लग गई। 
राष्ट्रीय लोक दल की ओर से अजीत सिंह ने यूपी के मुजफ्फरनगर से चुनाव लड़ा था लेकिन मोदी लहर में उन्हें भी अपनी सीट गवानी पड़ी। इस सीट से बीजेपी के संजीव बलियान ने जीत हासिल की है। दूसरी ओर उनके बेटे जयंत चौधरी ने यूपी के बागपत से चुनाव लड़ा था, जिन्हें बीजेपी के सत्यपाल सिंह ने हरा दिया। यूपी की राजनीति में अजीत सिंह एक बड़ा नाम है लेकिन मोदी राज में वह फीके पड़ गए। 
सिंधिया राज घराने से ताल्लुक रखने वाले माधवराव सिंधिया के बेटे और कांग्रेसी नेता ज्योरादित्य सिंधिया भी बीजेपी के उम्मीदवार कृष्णपाल सिंह से चुनाव हार गए। इसी साल उन्हें राहुल गांधी ने वेस्ट यूपी का महासचिव बनाकर एक बड़ी जिम्मेदारी दी थी। इसके साथ ही उन्हें उत्तर प्रदेश के 40 संसदीय क्षेत्रों का प्रभारी बनाया गया था लेकिन वह अपना अच्छा प्रदर्शन नहीं दिखा पाए। -
बिहार में लालू यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती ने RJD की ओर से पाटलीपुत्र से चुनाव लड़ा था लेकिन मोदी लहर में उनका प्रदर्शन भी फीका रहा। मीसा को बीजेपी के राम कृपाल यादव ने भारी मतों से हरा दिया।
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राजस्थान के जोधपुर की लोकसभा सीट से इस साल सीएम अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत ने चुनाव लड़ा था। उन्हें बीजेपी के गजेंद्र सिंह शेखावत से हारना पड़ा।
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भीमराव अबंडेकर के पोते प्रकाश यशवंत अंबेडकर ने VBA (Vanchit Bahujan Aghadi) की ओर से महाराष्ट्र के अकोला से चुनाव लड़ा था जिन्हें बीजेपी के संजय शामराव धोत्रे से हारना पड़ा।