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Lalu Prasad Yadav: लालू प्रसाद यादव की कई कहानियां और किस्से काफी चर्चित हैं। भले लालू आज सक्रिय राजनीति से दूर चारा घोटाला की सजा काट रहे हों लेकिन उनसे जुड़ी कहानियां आज भी चर्चा में रहती हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव 8 चरणों में होंगे। सबसे पहले चरणबद्ध तरीके से चुनाव की शुरुआत बिहार से हुई थी। तब बिहार के तत्कालीन सीएम लालू और मुख्य चुनाव आयुक्त टी एन शेषन में काफी तल्खी भी देखने को मिली थी।
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टी एन शेषन 1991 से 1996 तक मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर रहे। अपने इस कार्यकाल में उन्होंने चुनाव सुधार पर काफी काम किया। अपने काम के तरीके को लेकर शेषन कई राजनेताओं के आंखों की किरकिरी भी बने।
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1995 के बिहार विधानसभा के चुनाव में पहली बार शेषन ने चार चरणों में चुनाव कराने का फैसला किया। कई बार चुनाव की तारीखें भी बदलीं।
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बिहार में बूथ कैप्चरिंग और हिंसा की घटनाओं से चुनाव डिस्टर्ब किये जाने की खबरें पहले आम रहा करती थीँ। इनसे निबटने के लिए शेषन ने पहली बार भारी मात्रा में अर्ध सैनिक बलों की तैनाती की और उन्हीं के देख रेख में चुनाव करवाया।
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शेषन ने विभिन्न कारणों से उस विधानसभा चुनाव की तिथियों में चार बार परिवर्तन किया। तब टीएन शेषन के आलोचकों में लालू अव्वल माने जाने लगे थे।
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चुनाव के दौरान शेषन व लालू के बीच जो भी हुआ, उसका जिक्र पत्रकार संकर्षण ठाकुर ने अपनी किताब 'बंधु बिहारी' में किया है। किताब में बताया गया है कि चुनाव के दौरान हर सुबह अपने आवास पर होने वाली अनौपचारिक बैठकों में लालू के गुस्से के केंद्र में शेषन ही होते थे।
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किताब के मुताबिक ऐसी ही एक बैठक में लालू ने कहा था, ''शेषन पगला सांड जैसा कर रहा है। मालूम नहीं है कि हम रस्सा बांध के खटाल में बंद कर सकते हैं।'
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किताब में एक किस्सा ये भी बताया गया है कि लालू ने उस दौरान तो ये भी कह दिया था कि ई शेषनवा जानता नहीं है हमें, हम इसके भैंसिया पे चढ़ा के गंगाजी में हेला देंगे।
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फिलहाल शेषन के नेतृत्व में बिहार विधानसभा के चुनाव संपन्न हुए। इस चुनाव में लालू प्रसाद यादव पिछली बार से भी ज्यादा सीटों के साथ सरकार बनाने में सफल रहे।
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All Photos: Indian Express Archives and PTI