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'केरल ने हमेशा से ही सांप्रदायिक सौहार्द्र के शानदार उदाहरण पेश किए हैं। यह शादी उस वक्त हुई है, जब धर्म के नाम पर लोगों को बांटने की कोशिश हो रही है। केरल एक है और हमेशा एक रहेगा।'
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 22 वर्षीय अंजू बेहद गरीब परिवार से हैं। उनके पिता का स्वर्गवास हो चुका है। घर की माली हालत देखते हुए अंजू की मां ने मस्जिद कमेटी से मदद की गुहार लगाई थी।
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अंजू की मां की अपील पर चेरुवल्ली मुस्लिम जमात मस्जिद ने परिसर में ही विवाह संपन्न कराने का मन बनाया।
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इस शादी में करीब 1000 लोगों को निमंत्रण दिया गया था।
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मस्जिद परिसर में ही शादी में शामिल लोगों के लिए शाकाहारी भोजन का भी इंतजाम किया गया था।
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मस्जिद समिति ने नविवाहिता जोड़े को तोहफे में दस सोने के सिक्के और दो लाख रुपये भी दिए।
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शादी पूरे हिंदू मान्यताओं से हुई। शादी कराने के लिए मस्जिद में ही पुजारी को बुलाया गया था।
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संस्कृत के मंत्रोच्चार के साथ अंजू और शरत ने सात फेरे लिए।
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केरल के सीएम ने इस सादी की तारीफ करते हुए कहा- केरल ने हमेशा से ही सांप्रदायिक सौहार्द्र के शानदार उदाहरण पेश किए हैं। यह शादी उस वक्त हुई है, जब धर्म के नाम पर लोगों को बांटने की कोशिश हो रही है। केरल एक है और हमेशा एक रहेगा।