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INS VELA: नौसेना ने सोमवार को स्कॉर्पीन श्रेणी की चौथी पनडुब्बी ‘वेला’ का जलावतरण किया। P 75 प्रोजेक्ट के तहत पहली बार इस सबरमीन को पानी में उतारा गया। फ्रांस के सहयोग से भारत में निर्मित होने वाली छह युद्धक पनडुब्बियों में से यह चौथी है। इसका मकसद सामरिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र में भारत की रक्षा एवं सुरक्षा क्षमता बढ़ाना है। एक अधिकारी ने बताया कि रक्षा बेड़े में शामिल करने से पहले भारतीय नौसेना अभी इसके कई परीक्षण करेगी। रक्षा उत्पादन सचिव अजय कुमार की पत्नी वीना अजय कुमार ने मुंबई में मझगांव डॉकयार्ड में पनडुब्बी का जलावतरण किया। गौरतलब है कि 2005 में स्वदेशी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) ने स्कॉर्पीन श्रेणी की छह पनडुब्बियों के निर्माण एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को लेकर फ्रांसीसी सहयोगी कंपनी मेसर्स नेवल ग्रुप (औपचारिक रूप से डीसीएनएस के नाम से जानी जाने वाली) के साथ करार किया था। इस सौदे की कीमत 3.5 बिलियन यूएस डॉलर थी। उसी करार के तहत अब तक इंडियन नेवी में स्कॉर्पीन श्रेणी की 3 पनडुब्बियां भारत में पहले ही शामिल की जा चुकी है, INS वेला चौथी पनडुब्बी है। जानिए आईएनएस वेला के बारे में खास बातें। (ALL PICS-INDIAN NAVY FACEBOOK)
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INS वेला के लॉन्च के दौरान एमडीएल के अधिकारी ने बताया कि जल्द ही इसी श्रेणी की पांचवी पनडुब्बी का भी जलावतरण किया जाएगा। आपको बता दें कि इंडियन नेवी INS वेला से पहले एमडीएल कालवरी, खंडेरी और करंज पनडुब्बियों को भी लांच कर चुकी है। वेला का निर्माण हमारे देश में ही हुआ है, जिसमें तमाम तरह के आधुनिक फीचर्स हैं। इसमें दुश्मन को खोजकर उस पर सटीक निशाना दाग सकती है।

जानकारी के लिए आपको बता दें कि आईएनएस वेला को सबसे पहले भारतीय नौसेना की सेवा में 31 अगस्त, 1973 में शामिल किया गया था और इसने 37 साल तक अपनी सेवाएं दीं। यह देश की सबसे पुरानी पनडुब्बी है। 25 जून 2010 को इसे सेवामुक्त कर दिया गया था। INS वेला खूफिया जानकारी हासिल करने, माइंस बिछाने और एरिया सर्विलांस जैसे तकनीकियों से लैस है। 
बता दें कि नेवी की ताकत को बड़ाने के लिए आठ युद्धक पोतों और पांच पनडुब्बियों का निर्माण कार्य जारी है। ये पनडुब्बियां सतह से और अन्य पनडुब्बियों से होने वाले हमले को नाकाम करने की क्षमता रखती हैं। इससे दुश्मन देश को भारत में समद्री रास्ते से घुसने और यहां हमले करने से पहले हमारी ताकत के बारे में सोचना पड़ेगा। -
मझगांव डॉक में उपस्थित लोगो के समूह को संबोधित करते हुए रक्षा सचिव कुमार ने कहा, ‘‘एमडीएल देश में पनडुब्बियों का निर्माण करने वाली ऐसी पहली पोत फैक्ट्री है जिसने 1992 में आईएनएस शल्की बनाया था।’’
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एमडीएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक राकेश आनंद ने कहा, ‘‘20 अप्रैल को पी5 बी विध्वंसक ‘इंफाल’ और आज वेला के लांच के साथ हमने देश की सुरक्षा की दिशा में यह योगदान किया है।’’

इंडियन नेवी में शामिल हुई INS वेला आधुनिक मशीनरी और प्रौद्योगिकी से लैस है। यह पनडुब्बी टॉरपीडो और ट्यूब लॉन्च्ड एंटी-शिप मिसाइल से हमला करने में भी सक्षम है।