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देश में कई शख्सियतें ऐसी हैं जो डॉक्टरी की पढ़ाई और प्रैक्टिस करने के बाद इस पेशे से अलग हो गए। कुछ ने मनोरंजन जगत को चुना तो कुछ राजनीति या फिर किसी दूसरी फील्ड में सक्रीय हो गए। ऐसे बहुत से कलाकार और नेता कोरोना से उपजे इस संकट के काल में अपने डॉक्टरी अनुभवों का इस्तेमाल मरीजों की सेवा के लिए कर रहे हैं। बीजेपी के ये 5 बड़े नेता भी राजनीति में आने से पहले डॉक्टर रह चुके हैं। आइए जानते हैं इनमें से कौन इस महामारी में किस तरह से अपनी डिग्री और अनुभव का इस्तेमाल कर रहा है।
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संजय जायसवाल बिहार में पश्चिमी चंपारन से बीजेपी के लोकसभा सांसद हैं। उन्होंने पटना से ही एमबीबीएस और एमडी की पढ़ाई की है। कुछ सालों तक डॉक्टरी करने के बाद उन्होंने राजनीति में आने का फैसला कर लिया। फिलहाल कोरोना से फैली महामारी के बीच वह अपने अनुभव का इस्तेमाल मरीजों की सेवा के लिए कर रहे हैं। संजय जायसवाल जरूरतमंदों को ऑनलाइन डॉक्टरी सलाह भी दे रहे हैं। (Photo: Sanjay Jaiswal Twitter)
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राज्यसभा में बीजेपी के सांसद अनिल जैन भी डॉक्टर रह चुके हैं। राजनीति में आने से पहले बतौर सर्जन काम किया करते थे। सांसद बनने के बाद से ही उन्होंने डॉक्टरी छोड़ दी थी। लेकिन कोरोना से फैले इस संकट की घड़ी में भी वह अपने डॉक्टरी अनुभवों का इस्तेमाल कर रहे हैं। लोगों को मेडिकल सलाह देने के साथ ही उनके इलाज की व्यवस्था भी करा रहे हैं। (Photo: Anil Jain Twitter)
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केंद्रीय स्वास्थ मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने दिल्ली से ही एमबीबीएस और एमडी किया है। स्वास्थ्य मंत्री होने के नाते उनपर इस समय काफी जिम्मेदारियां हैं। शायद इन्हीं व्यस्तताओं के कारण वह बतौर डॉक्टर लोगों की सेवा के लिए समय नहीं निकाल पा रहे। हालांकि बतौर स्वास्थ्य मंत्री वह देश के मौजूदा हालात में सुधार के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। (फोटो- पीटीआई)
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गौतमबुद्ध नगर से बीजेपी सांसद और महेश शर्मा भी डॉक्टर रह चुके हैं। महेश शर्मा के कई अस्पताल भी चलते हैं। उनके सोशल मीडिया के माध्यम से इस तरह की बातें कही जा रही हैं कि वह संकट की इस घड़ी में अपने अनुभवों का इस्तेमाल करते हुए मरीजों का इलाज भी कर रहे हैं।
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बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा भी डॉक्टर रहे हैं। उन्होंने एमबीबीएस और एमएस करने के बाद दिल्ली के हिंदू राव हॉस्पिटल में बतौर मेडिकल ऑफिसर भी अपनी सेवाएं दी हैं। कोरोना से उपजे माहौल में अभी तक इस तरह की कोई खबर नहीं आई है जिसमें कहा गया हो कि वह अपने डॉक्टरी के अनुभव का इस्तेमाल मरीजों की सेवा के लिए कर रहे हों। इस बात को लेकर अकसर सोशल मीडिया में उन्हें ट्रोल भी किया जाता रहा है।