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पीएम नरेंद्र मोदी जितने लोकप्रिय जनता के बीच हैं उतना ही समन्वय वह अपने नीचे काम करने के वालों के साथ भी रखते हैं। उन्हें अपनी पार्टी के लोगों से बेहतर तरीके से काम करवाने के लिए भी पहचाना जाता है। जैसा कि वह तमाम दफा इंटरव्यू में भी बयां कर चुके हैं कि वे लोगों ने आराम से समझकर और समझाकर काम निकलवाते हैं। दूसरी बार कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने हाल ही में साउथ ब्लॉक की स्पेशल टीम का चयन किया है, जिसके तीन सदस्यों को अहम जिम्मेदारी दी गई है और यही वजह है कि इस टीम को 'स्पेशल थ्री' बताया जा रहा है। साउथ ब्लॉक की टीम के ये वो खास सदस्य हैं जो पीएमओ से लेकर मंत्रालय और राज्य सरकारों के बीच तालमेल बनाए रखते हैं और पीएम मोदी को सभी चीजों के बारे में अवगत कराते हैं। इन अधिकारियों से ही पीएम मोदी की ताकत दोगुनी होती है। 2014 के बाद जनता का विश्वास मत जीतने के बाद साल 2019 में मोदी दोबारा प्रधानमंत्री की कुर्सी पर काबिज हैं। आइए डालते हैं पीएम मोदी के दूसरे कार्यकाल में उनकी साउथ ब्लॉक टीम पर एक नजर।
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नृपेंद्र मिश्रः स्पेशल 3 में नृपेंद्र मिश्र का नाम पहले नंबर पर आता है। नृपेंद्र यूपी कैडर के 1967 बैच के आईएएस ऑफिसर हैं और उन्हें कैबिनेट रैंक दी गई है। नृपेंद्र पीएम मोदी के प्रिंसिपल सेक्रेटरी के तौर पर काम करते हैं और इसके साथ ही सरकार की सभी स्कीमों की मॉनीटरिंग भी करते हैं। बताया जाता है कि नृपेंद्र मोदी के सबसे पसंदीदा व्यक्तियों में से एक हैं। वह उनके काम से काफी खुश रहते हैं। नृपेंद्र PMO से मंत्रालयों और राज्य सरकारों के बीच तालमेल कराते हैं। नृपेंद्र ने हार्वर्ड केनेडी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। उन्हें राजनीति की भी पैनी समझ है।
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पीके मिश्रः साउथ ब्लॉक की स्पेशल 3 में दूसरा नाम आता है पीके मिश्र का। गुजरात कैडर के 1972 बैच के IAS अधिकारी रह चुके पीके को मोदी के दूसरे कार्यकाल में भी कैबिनेट रैंक मिला है। वह पीएम मोदी के अतिरिक्त प्रधान सचिव बनाए गए हैं। नीतिगत मुद्दों पर उनकी हर राय को पीएम मोदी काफी अहमियत देते हैं। इसके अलावा स्पेशल 3 में पीके का काम पदों पर उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग करना भी है। वह मीडिया और सोशल लाइफ से हमेशा दूरी बनाए रखते हैं। कैबिनेट सचिवालय के साथ तालमेल और प्रशासनिक सुधारों में उनका काफी योगदान रहता है। पीके PMO और ब्यूरोक्रेसी के बीच कड़ी के तौर पर काम करते हैं। मिश्र ने इकॉनमिक्स में पीएचडी की है और वह वर्ल्ड बैंक के अडवाइजरी ग्रुप में भी शामिल हैं।
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अजीत डोभालः साल 2004 और 05 में इंटेलीजेंस ब्यूरो के निदेशक भी रहे हैं और फिलहाल वह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का कार्यभार संभाल रहे हैं। जानकारी के लिए आपको बता दें कि 74 वर्षीय डोभाल पीएम मोदी के पहले कार्यकाल में भी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार थे। उनके रहते हुए मोदी सरकार में दो बार सर्जिकल स्ट्राइक को कामयाबी मिली है। सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर बालाकोट की एयरस्ट्राइक जैसे अहम फैसलों में उनकी भागीदारी रही है। मिजोरम और पंजाब में उन्होंने कई मिशनों का नेतृत्व किया है। डोभाल ने विंग कमांडर अभिनंदन को पाकिस्तान से सही सलामत वापस लाने में भी अहम भूमिका निभाई थी।
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ये हा रायसीना हिल का साउथ ब्लॉक ऑफिस, जहां पर ये सभी अधिकारी बैठकर दिशा निर्देश जारी करते हैं।