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वास्तविकता अक्सर कल्पना से कहीं ज्यादा अजीब और रोचक होती है। क्या आप जानते हैं कि इंसान का शरीर भी हल्की-सी रोशनी उत्सर्जित करता है? यह रोशनी इतनी कमजोर होती है कि हमारी आंखें इसे नहीं देख पातीं, लेकिन अत्याधुनिक और अल्ट्रा-सेंसिटिव कैमरे इसे कैद करने में सक्षम हैं। (Photo Source: Unsplash)
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जापान के वैज्ञानिकों ने पहली बार इंसानों से निकलने वाली इस बेहद हल्की रोशनी की तस्वीरें ली हैं। यह खोज यह साबित करती है कि मानव शरीर में भी बायोल्यूमिनेसेंस (Bioluminescence) मौजूद है। (Photo Source: Freepik)
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क्या है बायोल्यूमिनेसेंस?
बायोल्यूमिनेसेंस वह प्रक्रिया है जिसमें जीवित कोशिकाओं के भीतर होने वाली जैव-रासायनिक प्रतिक्रियाओं के कारण प्रकाश उत्पन्न होता है। अब तक यह प्रक्रिया जुगनू, ग्लो-वर्म, कुछ समुद्री मछलियों और अन्य जीवों में देखी जाती थी, लेकिन इंसानों में इसे कैमरे पर पहली बार रिकॉर्ड किया गया है। (Photo Source: PLoS ONE) -
कैसे हुई यह खोज?
रिसर्चर्स ने PLoS ONE नामक ऑनलाइन जर्नल में प्रकाशित अपने अध्ययन में बताया कि उन्होंने कई दिनों तक स्वयंसेवकों के ऊपरी शरीर की तस्वीरें अल्ट्रा-सेंसिटिव कैमरों से लीं। इन कैमरों को इतनी कम रोशनी पकड़ने के लिए डिज़ाइन किया गया था, जो इंसानी आंखों की क्षमता से लगभग हजार गुना कम होती है। (Photo Source: PLoS ONE) -
दिन के समय के साथ बदलती है चमक
अध्ययन में यह भी सामने आया कि मानव शरीर से निकलने वाली यह रोशनी 24 घंटे के चक्र का पालन करती है। दोपहर और देर शाम के समय यह रोशनी सबसे अधिक होती है, रात के समय इसका स्तर सबसे कम पाया गया। सबसे ज्यादा रोशनी गालों, माथे और गर्दन के हिस्से से निकलती है। (Photo Source: Pexels) -
हैरानी की बात क्या है?
दिलचस्प बात यह है कि जिन हिस्सों से सबसे अधिक रोशनी निकलती है, वे शरीर के सबसे गर्म हिस्से नहीं होते। यानी यह चमक शरीर के तापमान से नहीं, बल्कि कोशिकाओं के अंदर होने वाली रासायनिक प्रक्रियाओं से जुड़ी होती है। (Photo Source: Freepik) -
क्यों चमकता है इंसानी शरीर?
जब शरीर की कोशिकाएं सांस लेने (cell respiration) की प्रक्रिया से ऊर्जा बनाती हैं, तो इस दौरान फ्री रेडिकल्स नामक अत्यधिक सक्रिय अणु बनते हैं। ये अणु जब लिपिड्स और प्रोटीन के साथ प्रतिक्रिया करते हैं, तो कुछ अणु ‘उत्तेजित’ हो जाते हैं। यही अणु फ्लोरोफोर्स नामक रसायनों से प्रतिक्रिया करके फोटॉन्स (प्रकाश कण) उत्सर्जित करते हैं। (Photo Source: Freepik) -
क्या इसका कोई फायदा है?
वैज्ञानिकों के अनुसार, इतनी कमजोर रोशनी का इंसानों में कोई प्रत्यक्ष विकासात्मक या जैविक लाभ नहीं है। जानवरों में बायोल्यूमिनेसेंस का उपयोग साथी को आकर्षित करने, शिकार करने या रोशनी के लिए होता है, लेकिन इंसानों में यह केवल एक जैव-रासायनिक उप-उत्पाद (side-effect) माना जाता है। (Photo Source: Pexels) -
भविष्य में क्या हो सकता है?
फिलहाल इस खोज के व्यावहारिक उपयोग सीमित हैं, लेकिन वैज्ञानिक मानते हैं कि भविष्य में यह तकनीक स्वास्थ्य जांच, मेटाबॉलिज़्म स्टडी और मेडिकल रिसर्च में मददगार साबित हो सकती है। (Photo Source: Pexels)
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