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उत्तर पूर्वी दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर हिंसा भड़की हुई है। (फाइल फोटो)
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अंग्रेजी अखबार द टेलीग्राफ ने लिखा है कि गुजरात मॉडल दिल्ली पहुंच चुका है। अखबार ने ये भी प्रमुखता से उल्लेख किया है कि इस हिंसा में रुद्राक्ष की माला कलम से ज्यादा सुरक्षित है। बता दें कि मंगलवार को कुछ पत्रकार भी इस हिंसा के शिकार हुए।
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इंडियन एक्सप्रेस ने इस हिंसा के लिए दिल्ली पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाया है।
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हिंदी अखबार दैनिक जागरण ने दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश को प्रमुखता दी है।
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अमर उजाला ने भी दैनिक जागरण की ही तरह शूट ऐट साइट के आदेश को अपने पहले पन्ने पर जगह दी है।
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टाइम्स ऑफ इंडिया की बात करें तो उसने पहले पेज पर बताया है कि, 'दिल्ली में हिंसक माहौल ने 13 लोगों की जान ले ली। हिंसा ग्रसित इलाकों के लिए पैरामिलिट्री फोर्स निकल पड़ी है।'
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ट्रिब्यून ने कुछ इस तरह से दिल्ली हिंसा को अपने पहले पन्ने पर जगह दी है।
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हिंदुस्तान टाइम्स ने दंगों को साम्प्रदायिक करार देते हुए 13 लोगों के मौत की खबर को पहले पन्ने पर जगह दी है।