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भगवान श्रीकृष्ण को इस संसार का पालनकर्ता और भगवान विष्णु का आठवां अवतार माना जाता है। द्वापर युग में मथुरा की धरती पर जन्म लेकर, उन्होंने अपने जीवन में अनेक दिव्य लीलाएं कीं और संसार को धर्म, प्रेम और करुणा का मार्ग दिखाया। (Photo Source: Pexels)
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श्रीकृष्ण का स्वरूप इतना बहुआयामी है कि उन्हें अनेक नामों से पुकारा जाता है। उनके 108 नाम (भगवान कृष्ण के 108 नाम) न केवल उनकी विशेषताओं और गुणों का वर्णन करते हैं, बल्कि उनके सम्पूर्ण स्वरूप को भी प्रकट करते हैं। प्रत्येक नाम के पीछे एक कहानी, एक भावना और एक गहरा आध्यात्मिक अर्थ छिपा है। (Photo Source: Pexels)
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श्रीकृष्ण के 108 नाम और उनके अर्थ
अचला : अटल और अडिग भगवान।
अच्युत : अचूक प्रभु या जिसने कभी भूल न की हो और जो कभी त्रुटि न करें।
अद्भुतह : अद्भुत स्वरूप वाले प्रभु।
आदिदेव : देवताओं के स्वामी।
अदित्या : देवी अदिति के पुत्र।
अजन्मा : जिनकी शक्ति असीम और अनंत हो।
अजया : मृत्यु और जीवन पर विजय पाने वाले।
अक्षरा : अविनाशी प्रभु।
अमृत : अमृत जैसा स्वरूप वाले।
अनादिह : जिनकी कोई शुरुआत नहीं या सर्वप्रथम हैं जो।
आनंद सागर : असीम आनंद के स्रोत।
अनंता : अंतहीन देव। (Photo Source: Pexels) -
अनंतजीत : हमेशा विजयी होने वाले।
अनया : जिनका कोई स्वामी न हो।
अनिरुद्धा : जिनका अवरोध न किया जा सके।
अपराजित : जिन्हें हराया न जा सके।
अव्युक्ता : माणभ की तरह स्पष्ट।
बाल गोपाल : भगवान कृष्ण का बाल रूप।
बलि : सर्वशक्तिमान।
चतुर्भुज : चार भुजाओं वाले प्रभु।
दानवेंद्रो : वरदान देने वाले।
दयालु : करुणा के सागर।
दयानिधि : सब पर दया करने वाले।
देवाधिदेव : देवों के देव।
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देवकीनंदन : देवकी के लाल (पुत्र)।
देवेश : ईश्वरों के भी ईश्वर।
धर्माध्यक्ष : धर्म के रक्षक।
द्वारकाधीश : द्वारका के अधिपति।
गोपाल : ग्वालों के साथ खेलने वाले।
गोपालप्रिया : ग्वालों के प्रिय।
गोविंदा : गाय, प्रकृति, भूमि को चाहने वाले।
ज्ञानेश्वर : ज्ञान के भगवान।
हरि : पाप हरने वाले।
हिरण्यगर्भा : सृष्टि के रचयिता।
ऋषिकेश : सभी इन्द्रियों के स्वामी।
जगद्गुरु : ब्रह्मांड के गुरु।
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जगदीशा : सबके स्वामी।
जगन्नाथ : समस्त जगत के नाथ।
जनार्धना : सबका पालन करने वाले।
जयंतह : सभी दुश्मनों को पराजित करने वाले।
ज्योतिरादित्या : सूर्य जैसी आभा वाले।
कमलनाथ : देवी लक्ष्मी के स्वामी।
कमलनयन : जिनके कमल के समान नेत्र हैं।
कामसांतक : कंस का वध करने वाले।
कंजलोचन : कमल जैसे नेत्र वाले।
केशव : सुंदर केश वाले।
कृष्ण : सांवले रंग वाले।
लक्ष्मीकांत : देवी लक्ष्मी के प्रभु।
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लोकाध्यक्ष : तीनों लोकों के अधिपति।
मदन : प्रेम के प्रतीक।
माधव : ज्ञान के भंडार।
मधुसूदन : मधु नामक दानव का वध करने वाले।
महेन्द्र : इन्द्र के स्वामी।
मनमोहन : सबका मन मोह लेने वाले।
मनोहर : बहुत ही सुंदर रूप-रंग वाले प्रभु।
मयूर : मुकुट पर मोरपंख धारण करने वाले भगवान।
मोहन : सभी को आकर्षित करने वाले।
मुरली : बांसुरी बजाने वाले प्रभु।
मुरलीधर : मुरली धारण करने वाले।
मुरली मनोहर : मुरली बजाकर मोह लेने वाले।
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नंदगोपाल : नंद बाबा के पुत्र।
नारायन : सबको शरण में लेने वाले।
निरंजन : निर्मल, निष्पाप।
निर्गुण : जिनमें कोई अवगुण या दोष न हो।
पद्महस्ता : जिनके कमल जैसे हाथ हैं।
पद्मनाभ : जिनकी कमल के आकार की नाभि हो।
परब्रह्मन : परम सत्य स्वरूप।
परमात्मा : सभी आत्माओं के स्वामी।
परम पुरुष : श्रेष्ठ व्यक्तित्व वाले।
पार्थसारथी : अर्जुन के सारथी।
प्रजापति : सभी प्राणियों के स्वामी।
पुण्य : पवित्र और निर्मल व्यक्तित्व।
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पुरुषोत्तम : उत्तम पुरुष।
रविलोचन : सूर्य जिनका नेत्र है।
सहस्राकाश : हजार आंखों वाले प्रभु।
सहस्रजीत : हजारों को जीतने वाले।
सहस्रपात : जिनके हजारों पैर हों।
साक्षी : समस्त देवों के गवाह।
सनातन : अनादि और अविनाशी या जिनका कभी अंत न हो।
सर्वजन : सब कुछ जानने वाले।
सर्वपालक : सभी का पालन करने वाले।
सर्वेश्वर : समस्त देवों से ऊंचे।
सत्य वचन : सत्य कहने वाले।
सत्यव्त : सत्य पर अडिग या श्रेष्ठ व्यक्तित्व वाले देव।
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शंतह : शांत स्वभाव वाले।
श्रेष्ठ : महान।
श्रीकांत : अद्भुत सौंदर्य के स्वामी।
श्याम : सांवले रंग वाले।
श्यामसुंदर : सांवले होते हुए भी सुंदर दिखने वाले।
सुदर्शन : रूपवान या सुंदर रूप वाले।
सुमेध : सर्वज्ञानी या अत्यंत बुद्धिमान।
सुरेशम : सभी जीव-जंतुओं के देव।
स्वर्गपति : स्वर्ग के राजा।
त्रिविक्रमा : तीनों लोकों के विजेता।
उपेन्द्र : इन्द्र के भाई।
वैकुंठनाथ : वैकुंठ के स्वामी या स्वर्ग के रहने वाले।
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वर्धमानह : जिनका कोई निश्चित आकार न हो।
वासुदेव : सभी जगह विद्यमान रहने वाले या सर्वव्यापी भगवान।
विष्णु : भगवान विष्णु के स्वरूप।
विश्वदक्शिनह : निपुण और कुशल।
विश्वकर्मा : ब्रह्मांड के निर्माता।
विश्वमूर्ति : पूरे ब्रह्मांड का स्वरूप।
विश्वरूपा : ब्रह्मांड हित के लिए रूप धारण करने वाले।
विश्वात्मा : ब्रह्मांड की आत्मा।
वृषपर्व : धर्म के रक्षक।
यदवेंद्रा : यादव वंश के मुखिया।
योगि : प्रमुख गुरु या श्रेष्ठ योगी।
योगिनाम्पति : योगियों के स्वामी।
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