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Indian Airforce: इंडियन एयरफोर्स की फ्लाइट लेफ्टिनेंट फ्लाइट भावना कांत ने पहली ऑपरेशनल फाइटर पायलट बनकर इतिहास रचा है। हाल ही में भावना ने फाइटर एयरक्राफ्ट की ट्रेनिंग पूरी की है। इस बात की जानकारी इंडियन एयरफोर्स ने अपने ऑफीसियल फेसबुक और ट्विटर पेज पर दी है। लेफ्टिनेंट भावना वायुसेना के किसी भी युद्ध में शामिल होने को पूरी तरह से तैयार हैं। वह देश की पहली महिला हैं जिन्होंने इस ट्रेनिंग को सफलता पूर्वक पूरा किया है और ऑपरेशनल फाइटर बनकर नाम रोशन किया है। बता दें कि फ्लाइट लेंफ्टिनेंट भावना नवंबर 2017 में फाइटर पायलट के तौर पर वायुसेना में शामिल हुई थीं। भावना ने मार्च 2018 में मिग-21 बायसन एयरक्राफ्ट में अकेले उड़ान भरी थी, जिसके बाद से अब तक उनकी ट्रेनिंग चलती रही। भावना इंडियन एयरफोर्स में शामिल होने वाली महिलाओं के पहले बैच की एकलौती मेंबर हैं जो ऑपरेशनल फाइटर बन गई हैं। (All Pics- Indian Air force Facebook)

यह वही लेफ्टिनेंट भावना कांत हैं जो अवनि चतुर्वेदी और मोहना सिंह के साथ ही वायुसेना में शामिल हुई थीं, जिनकी ट्रेनिंग राजस्थान के एयरबेस पर हुई है। लंबी ट्रेनिंग के बाद भावना अब किसी भी युद्ध में जाकर दुश्मनों के छक्के छुड़ाने को तैयार हैं। 
अवनि और मोहना सिंह अलग-अलग एयरबेसों पर इन दिनों ट्रेनिंग कर रही हैं। दोनों की ट्रेनिंग आखिरी दौर में हैं। इसके बाद ये दोनों भी ऑपरेशनल फाइटर बन जाएंगी। इंडियन एयरफोर्स में कुल 94 महिला पायलट हैं, लेकिन सिर्फ 3 मोहना सिंह , अवनि और भावना फाइटर पायलट हैं, जो मिराज, सुखोई, मिग 21 और जेगुआर जैसे एयरक्राफ्ट उड़ाती हैं। ये तीनों महिलाएं देश का गौरव हैं। 
भावना ने बंगलौर के एमएस कॉलेज Be इलेक्ट्रिकल की पढ़ाई की है। भावना कांत बिहार के दरभंगा जिले के बाऊर गांव की निवासी हैं। उनका पालन-पोषण एक साधारण परिवार में हुआ है। 
इंडियन एयरफोर्स महिलाओं को बतौर पायलट भर्ती कर देश की पहली सशस्त्र सेना बन गई है, जिसने उनके अंदर के आत्मविश्वास को समझा और वह उन्हें मौका दिया। -
इंडियन एयरफोर्स में पायलटों के अलावा भी तमाम विभागों में करीब 1500 महिलाएं तैनात हैं जो अपने- अपने काम में दक्ष हैं।
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जानकारी के लिए आपको बता दें कि वायुसेना में बतौर फाइटर पायलट शामिल होने वाले सदस्यों को लंबी ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है। एयरफोर्स अकादमी में फाइटर महिला पायलटों को बेसिक उड़ान भरने के बाद एडवांस जेट ट्रेनर हॉक पर उड़ान की ट्रेनिंग दी जाती है। इसके बाद फाइटर जेट पर वायुसेना की ओर से ट्रेनिंग दी जाती। फिर लंबे समय तक सीनियर फाइटर पायलट भी सभी पायलटों की ट्रेनिंग लेता है, जब वह यह जान लेता है कि फाइटर पायलट पूरी तरह से अकेले उड़ान भरने के दौरान हर मुश्किल का सामना करने के लिए तैयार है तब जाकर उसकी ट्रेनिंग कम्प्लीट होती है। इस तरह से एक फाइटर पायलट दिन और रात उड़ान भरकर पूरी तरह से दक्ष होते हैं, तब जाकर कमांडिंग ऑफिसर उन्हें किसी भी युद्ध में भेज सकते हैं।

फाइटर पायलट अवनी चतुर्वेदी ने अपने फेसबुक पेज पर एक तस्वीर शेयर लिखा, बहुत खूबसूरत पक्तियों में वायुसेना की महिलाओं के बारे में लिखा है, कभी महक की तरह हम गुलों से उड़ते हैं, कभी धुएं की तरह पर्वतों से उड़ते हैं! ये केचियाँ हमें उड़ने से खाक रोकेंगी, की हम परों से नहीं हौसलों से उड़ते हैं!