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2012 Delhi Gang Rape and Murder Case Convicts Hanging: दिल्ली गैंगरेप के चारों दोषियों को शुक्रवार (20 मार्च) की सुबह 5.30 बजे फांसी के फंदे पर लटका दिया गया। दोषियों को फांसी पर सोशल मीडिया यूजर्स खुश दिख रहे हैं। लोग लिख रहे हैं कि आज इतने लंबे समय के बाद पीड़िता को असल न्याय मिला है। इन सबके बीच एक शख्स ऐसा भी है जिसे सोशल मीडिया दिल खोलकर सलाम कर रहा है। इस शख्स का नाम है एडवोकेट सीमा कुश्वाहा। सीमा कुश्वाहा (Seema Kushwaha) ने ही दिल्ली गैंगरेप पीड़िता का केस लड़ा और चारों दोषियों को उनके अंजाम तक पहुंचाया।
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सीमा कुश्वाहा उत्तर प्रदेश के इटावा जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से लॉ की पढ़ाई की है। हालांकि वह वकालत में आने से पहले सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रही थीं।
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12 दिसंबर 2012 को जब दिल्ली गैंगरेप की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था तब सीमा दिल्ली हाई कोर्ट में ट्रेनिंग कर रही थीं।
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इस घटना की अमानवीयता से वह इतना परेशान हुईं कि उन्होंने दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने की ठानते हुए पीड़िता का केस लड़ने का तय किया।
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दिल्ली गैंगरेप केस सीमा कुश्वाहा की जिंदगी का पहला केस था।
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7 साल से ज्यादा समय तक चले इस केस को सीमा कुश्वाहा ने नि:शुल्क लड़ा।
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निचली अदालत से सुप्रीम कोर्ट तक में सीमा विश्वास ने दोषियों को फांसी की सजा दिलाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी।
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कोर्ट के बाहर भी वह पीड़िता के परिवार के साथ खड़ी रहीं।
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दोषियों को फांसी के फंदे तक पहुंचाने के लिए चली इस लंबी लड़ाई में सीमा कुश्वाहा का पीड़िता के परिवार के साथ भावनात्मक रिश्ता बन गया है।
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2014 में सीमा ज्योति लीगल ट्रस्ट से भी जुड़ीं, जो दुष्कर्म पीड़ितों के लिए मुफ्त में केस लड़ता है और उन्हें कानूनी सलाह देता है।