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नागरिकता संशोधन कानून को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। दिल्ली के शाहीन बाग से लेकर लखनऊ के घंटाघर तक पर लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। इन प्रदर्शनों में महिलाएं बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रही हैं। इसी कड़ी में 4 फरवरी को आजमगढ़ के बिलरिया गंज में बड़ी संख्या में महिलाएं CAA के खिलाफ प्रदर्शन कर रही थीं। लेकिन बिलरियागंज के जौहर पार्क में बैठे इन प्रदर्शनकारियों पर यूपी पुलिस ने 5 फरवरी की अल सुबह सख्ती करते हुए वहां से हटा दिया। सोशल मीडिया में लोग लिख रहे हैं कि पुलिस ने भोर में 4 बजे के करीब प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया। ऐसे लोगों का आरोप है कि पुलिस ने उनपर पत्थर भी बरसाए। वहीं पुलिस का कहना है कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों से प्रदर्शन खत्म करने की अपील की लेकिन उन लोगों ने पुलिस पर ईंट-पत्थर चलाना शुरू कर दिया जिसके बाद हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। पुलिस ने लाठीचार्ज से इनकार किया है।

आजमगढ़ के बिलरियागंज में बड़ी संख्या में महिलाएं एकत्रित होकर सीएए के विरोध में प्रदर्शन कर रही थीं। -
प्रदर्शन कर रही महिलाओं के हाथों में तिरंगे और नागरिकता कानून के विरोध वाले प्लेकार्ड्स थे।
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सर्द रात में भी धरना स्थ्ल पर महिलाओं का विरोध प्रदर्शन जारी था।
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वहां के लोगों का कहना है कि पुलिस ने 5 फरवरी की सुबह 4 बजे के करीब प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया जिससे कई लोग घायल हो गए।
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सोशल मीडिया में ये तस्वीरें शेयर करते हुए लोग लिख रहे हैं कि योगी आदित्यनाथ के इशारे पर पुलिस ने महिलाओं के साथ बदसलूकी की है।
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एक महिला के सिर में गंभीर चोट लगने का दावा किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि पुलिस लाठीचार्ज में घायल वह महिला आईसीयू में भर्ती है।
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पुलिस ने लाठी चार्ज से इनकार करते हुए सिर्फ आंसू गैस के गोले छोड़ने की बात स्वीकार की है।

इस पूरे घटनाक्रम में उत्तर प्रदेश पुलिस ने 5 फरवरी, 2020 को देशद्रोह के आरोप में 19 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने बताया कि जो लोग गिरफ्तार किए गए उनका नाम उन 35 लोगों में था जिनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। इनमें एक महिला मन्नी बानो भी शामिल हैं, जिन्हें दिल का मरीज होने के चलते छोड़ दिया गया। (प्रतीकात्मक तस्वीर)