-
विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के प्रति सम्मान, प्रशंसा और प्यार प्रकट करते हुए अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस हर वर्ष, 8 मार्च को मनाया जाता है। इस दिन को महिलाओं के आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धियों के तौर पर त्यौहार के रुप में मनाया जाता है। अमेरिका में सोशलिस्ट पार्टी के आह्वान पर, यह दिवस सबसे पहले 28 फरवरी 1909 को मनाया गया। इसके बाद इस दिवस को फरवरी माह के आखिरी इतवार को मनाया जाने लगा। 1990 में सोशलिस्ट इंटरनेशनल के कोपेनहेगन सम्मेलन में इसे अन्तर्राष्ट्रीय दर्जा दिया गया। जुलियन कैलेंडर के अनुसार 1917 की फरवरी का आखरी इतवार 23 फरवरी को था जबकि ग्रेगेरियन कैलैंडर के अनुसार उस दिन 8 मार्च था। इस समय पूरी दुनिया में ग्रेगेरियन कैलैंडर चलता है। इसी लिये 8 मार्च महिला दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।
-
उस समय अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस का प्रमुख ध्येय महिलाओं को वोट देने का अधिकार दिलवाना था, क्योंकि उस समय अधिकतर देशों में महिलाओं को वोट देने का अधिकार नहीं था।
-
भारत में महिलाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती जन्म लेना है। कोख में खत्म होने से अगर वे बच भी जाएं, तो विभिन्न अध्ययन बताते हैं कि बेटियों को बेटों की अपेक्षा कम भोजन दिया जाता है।
-
इस बार 8 मार्च 2017 को अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस एक नये थीम को लाया है। विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं का अतुल्नीय योगदान है, जिसे ध्यान में रखते हुए अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस ने आने वाले वर्ष 2030 तक महिलाओं से जुड़ी समस्याओं को हल करने का निश्चय किया है। इस साल के महिला दिवस के थीम को युनाइटेड नेशन के द्वारा 'वीमेन इन द चेंजिंग वर्ल्ड ऑफ वर्क-प्लानेट 50-50 बाय 2030' नाम दिया गया है।
-
इस थीम के पीछे का मकसद ये है कि एजेंडा 2030 तक इन्हें कैसे प्रयोग में लाया जा सकता है। -लिंग समानता को स्थापित करना और सभी महिलाओं और लड़कियों को सशक्त बनाना -अच्छी शिक्षा के प्रति लड़कियों को बढ़ावा देना। -महिलांओं के मानवाधिकार को बढ़ावा देना। -महिलायें जिन्हें 24 घंटे के लिए काम पर रहना होता है। घरेलू काम काज जिनमें इनकी पहचान खो जाती है लेकिन अप्रत्यक्ष रुप से देश, दुनिया के विकास में उनका अहम योगदान होता है। जिसके लिए उन्हें पहचान मिलनी चाहिए। – विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे लिंग भेद को खत्म किया जाना चाहिए। -नई तकनीक को महिलाओं से अवगत कराना, कार्य क्षेत्र में महिलाओं के साथ हिंसा ना होना।
-
देश-दुनिया का ऐसा कोई काम नहीं जो एक महिला के लिए संभव न हो।