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Delhi Violence: देश की राजधानी दिल्ली के कुछ इलाके पिछले तीन दिनों से साम्प्रदायिक हिंसा की आग में जल रहे हैं। उत्तर पूर्वी दिल्ली के इन इलाकों में बवाल तो शुरू हुआ नागरिकता संशोधन कानून को लेकर लेकिन देखते देखते इसने साम्प्रदायिक हिंसा का रंग ले लिया। इस हिंसा में अब तक 21 लोगों की मौत हो चुका है। वहीं कई गंभीर रूप से घायल हैं। इस हिंसा में घायलों और मारे गए लोगों के परिजनों ने जो हाल बयां किया वो किसी को भी विचलित कर सकता है। इस हिंसा में किसी के चेहरे पर गोली मार दी गई तो किसी के सिर में उपद्रवियों ने ड्रिल ही कर दिया।
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दंगाइयों ने 19 साल के विवेक चौधरी के सिर में बाईं तरफ मोटर ड्रिल मशीन से छेद कर दिया। विवेक के दोस्तों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि मंगलवार सुबह करावल नगर इलाके से शिव विहार की ओर जाते समय दंगाइयों ने उस पर हमला बोल दिया। विवेक के दोस्तों ने बताया कि भीड़ उसे घेरकर आई कार्ड मांगने लगी। पहचान पत्र ना दिखाने पर एक शख्स ने ड्रिल मशीन उसके सिर में घुसेड़ दी। विवेक के साथ के लोगों का कहना है कि ड्रिल का करीब 1.5 इंच हिस्सा अभी भी उसके सिर में फंसा हुआ है। डॉक्टरों का कहना है कि उसकी स्थिति काफी नाजुक है। विवेक अपने माता-पिता की इकलौती संतान है।
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इस साम्प्रदायिक हिंसा की चपेट में एक 12 साल का बच्चा जैदी भी है। जैदी मंगलवार सुबह अपने छोटे भाई को देखने निकला था। जब वह घोंडा चौक पहुंचा तो सड़क पर गिरे किसी घायल की मदद करने लगा। तभी दूसरी तरफ से गोली तली और बुलेट उसके कमर में आ घुसी।
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मुस्तफाबाद में रह रहे ऑटो ड्राइवर शाहिद को तब दंगाइयों ने गोली मार दी जब वह सवारी छोड़ने जा रहे थे। शाहिद की 6 महीने पहले ही शादी हुई थी।
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खरदामपुर में रहने वाले मुदस्सिर खान भी ऑटो चलाता था। मदस्सिर राशन का सामान लेने घर से निकला था तभी कुछ उपद्रवियों ने उसे सिर में गोली मार दी। मुदस्सिर के पीछे उनकी पत्नी, एक साल का बेटा और तीन साल की बेटी अकेली रह गई है। मुदस्सिर के घरवालों का कहना है कि वह तो किसी प्रोटेस्ट का हिस्सा भी नहीं था फिर भी उसकी जान ले ली गई।
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सलीम खान के 32 वर्षीय बेटे मोहम्मद आसिफ के दाएं कंधे पर गोली मार दी गई। सलीम ने इंडियन एक्स्प्रेस को बताया कि रविवार को कपिल मिश्रा की स्पीच के बाद उनके इलाके में हिंसा भड़क गई थी। मिल-जुलकर रहने वाले पड़ोसी भी एक दूसरे से उलझने लगे।
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45 वर्षीय राजबीर के चेहरे पर दंगाइयों ने गोली मारी थी। राजबीर के पड़ोसी हिमांशु पाल ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि, 'राजबीर अपने घर के बाहर बैठे था। तभी गोली चलने की आवाज आई..थोड़ी ही देर में देखा कि राजबीर अपने दरवाजे पर ही गिरे पड़े हैं। फौरन उन्हें जीटीबी अस्पताल ले आया गया।'