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नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर उत्तर पूर्वी दिल्ली में हिंसा मंगलवार (25 फरवरी) को भी जारी रही। इस हिंसा ने साम्प्रदायिक रंग अख्तियार कर लिया है। यह हिंंसा दिल्ली की पहचान को नुकसान पहुंचा रही है। हिंंदू-मुस्लिम भाईचारा दिल्ली की पहचान रही है। यह तस्वीर भी इस पहचान की गवाह रही है। शिवा ऑटो वर्क्स और त्यागी साबुन स्टोर के बीच जुल्फिकार अली की दुकान। ये तस्वीर मौजपुर की बताई जा रही है। मौजपुर में 24 फरवरी को काफी हिंंसा हुई। इस दौरान सीएए समर्थकों और विरोधियों, दोनों ने ही दिल्ली की पहचान की कद्र नहीं की और हिंसा व आगजनी में शरीक हुए।हिंदू-मुस्लिम एकता की दिल्ली की पहचान तार-तार हो गई। अब हर तरफ से शांति की अपील हो रही है। दिल्ली दुआ कर रही है कि उसके बाशिंदे उसकी पहचान को मिटने नहीं देंगे। (फोटो सोर्स: सोशल मीडिया)

दरअसल इस तस्वीर में तीन दुकानें दिख रही हैं। बाएं से पहली दुकान पर शिवा आॉटो वर्क्स है, बीच की दुकान क्षतिग्रस्त है जिसके ऊपर बोर्ड पर प्रोपराइटर का नाम जुल्फिकार मलिक लिखा हुआ है और तीसरी दुकान है त्यागी साबुन स्टोर। मौजपुर के कपिल ने 24 फरवरी को कोशिश की कि दिल्ली की 'पहचान' कमजोर न पड़े। उन्होंने कई स्थानीय लोगों के साथ मिल कर सड़क पर दोनों समुदायों के प्रदर्शनकारियों को अलग करने की कोशिश की। कपिल ने 'इंडियन एक्सप्रेस' से कहा- हमारी दुकानें जला दी गईं, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया और हमारे इलाके का नाम खराब हुआ। क्या अमेरिकी राष्ट्रपति को हम यही संदेश देना चाहते हैं? बता दें कि 24 फरवरी को ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दो दिन के लिए भारत आए थे। -
इस तस्वीर में उपद्रवियों की भीड़ से निकला शाहरुख नाम का एक शख्स सरेआम पिस्तौल लहराते हुए फायरिंग कर रहा है।
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जाफराबाद के रहने वाले शाहरुख ने वहां तैनात एक पुलिस वाले पर भी बंदूक तान दी थी। पुलिस वाले के करीब आने पर उसने ट्रिगर भी दबा दिया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।
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इस तस्वीर में सीएए के समर्थन में उतरे कुछ लोग सीएए का विरोध कर रहे एक शख्स को लाठी-डंडों से पीट रहे हैं।
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इस तस्वीर पर सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं कि क्या ऐसे ही भारत की कल्पना की गई थी। लोग लिख रहे हैं कि नफरत के सामने हिंदुस्तान की आत्मा दम तोड़ रही है।
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ये तस्वीर दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्सटेबल रतन लाल की है। 24 फरवरी को हुई हिंसा में उपद्रवियों ने रतनलाल की जान ले ली। उनके अलावा चार और लोग मारे गए। इनके नाम फुरकान, शाहिद और राहुल बताए गए। चौथे की पहचान सोमवार शाम तक नहीं हो सकी थी। मंगलवार शाम छह बजे तक मरने वालों की संख्या दस हो गई।
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दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्सटेबल रतन लाल की मौत पर सोशल मीडिया काफी आहत दिखा। लोग लिख रहे हैं कि माफ करना हम लोग आपको बचा नहीं पाए।
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उत्तर पूर्वी दिल्ली में चल रही इस हिंसा पर एक व्यक्ति ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि जब वह प्रदर्शन वाले इलाके में पहुंचा तो उसका सामना लाठी-डंडे लिए लोगों से हो गया। लोगों ने पूछा- हिंदू भाई हो? इस पर शख्स ने हां में सिर हिलाया और प्रदर्शनकारियों ने उसे जाने दिया।
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मौजपुर मंदिर के पास कई महिलाओं का कहना था कि वे लोग सोमवार सुबह 10 बजे हनुमान चालीसा पढ़ रही थींं, तभी कुछ उपद्रवी आए और पत्थरबाजी शुरू कर दी।
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उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए इस हिंसक उपद्रव में 25 फरवरी की शाम तक 1 पुलिसकर्मी समेत 10 लोगों की मौत हो गई है, वहीं एक डीसीपी समेत 150 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है। घायलों में कई पुलिसकर्मी भी हैं।