
इन दिनों राजनीति में हनुमान जी पर दिए नेताओं के बयान काफी चर्चा में हैं। किसी ने हनुमान को दलित तो किसी ने मुसलमान, किसी ने जाट तो किसी ने खिलाड़ी बताया है। साल 2018 में तमाम नेताओं के विवादित बयान लंबे समय तक चर्चा का विषय बने। इन नेताओं में भारतीय जनता पार्टी से लेकर AIMIM और समाजवादी पार्टी के नेता के बयान भी शामिल हैं। इनमें से किसी ने प्रधानमंत्री को लेकर 'अनपढ़ हैं मोदी' जैसा विवादित बयान दिया तो किसी ने राहुल गांधी को 'नाली का कीड़ा' कहा, किसी ने जया बच्चन को 'नाचने वाली' कहा तो किसी ने वसुंधरा राजे को 'मोटी' करार दिया। ऐसे कई विवादित बयान देकर विभिन्न पार्टियों के नेता खबरों की हेडलाइन में शुमार हुए। आइए जानते हैं वे कौन-कौन से नेता हैं, जो विवादित बयान देकर इस साल के चर्चित चेहरे बन गए। -
AIMIM पार्टी के विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी ने मोदी पर अभद्र टिप्पणी की थी। पीएम को लेकर अकबरुद्दीन ने कहा, आप चाय वाले थे, अब वजीर-ए-आजम बन जाइए। अकबरुद्दीन ने बयान देते हुआ कहा था, ''चाय..चाय..चाय..कड़क चाय, नरम चाय..चाय की केतली, चाय का पानी, चाय का चूल्हा…ये वजीए-ए-आजम है या क्या है..अरे चाय वाला था और अब बजीर-ए-आजम है..अब वजीर-ए-आजम जैसे बन जाओ''।
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योगी आदित्यनाथ का हनुमान जी को लेकर दिया गया बयान मौजूदा खबरों में सिसायी जुमला बना हुआ है। योगी ने अपने बयान में कहा था, ''बजरंगबली हमारी भारतीय परंपरा में ऐसे लोक देवता हैं जो स्वमं वनवासी हैं, निर्वासी हैं, दलित हैं, वंचित हैं, वह उत्तर से लेकर दक्षिण और पूरव से पश्चिम तक…सबको जोड़ने का कार्य बजरंगबली करते हैं।''
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केंद्रीय मंत्री अश्विन चौबे ने राहुल गांधी को लेकर विवादित बयान दिया था…उन्होंने कहा था, ''झूठी बातों का प्रचार, दुष्प्रचार करके पीएम पर इस प्रकार का कीचड़ फेकने का काम करते हैं…पीएम गगन के आकार की तरह हैं और कांग्रेस के अध्यक्ष का आकार 'नाली के कीड़े' के जैसा है''।
बीजेपी के पूर्व विधायक ज्ञानदेव अहूजा ने पूर्व पीएम जवाहर लाल नेहरू को लेकर विवादित बयान दिया था। अहूजा का कहना था, ''जवाहर लाल नेहरू पंडित नहीं थे..जो गाय का मांस खा जाएं…जो सुअर का मांस खा जाएं…वो पंडित कैसे?…सुअर मुस्लिमों के लिए नापाक है और गाय हमारे लिए पवित्र है..बाकी जीव जानों को खा जाएं..इसलिए वह पंडित नहीं थे।'' त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने कहा, "ये देश वो देश है, जहां महाभारत में संजय ने बैठकर धृतराष्ट्र को युद्ध में क्या हो रहा था, बता रहे थे… इसका मतलब क्या है? उस जमाने में टेक्नोलॉजी थी, इंटरनेट था, सैटेलाइट थी, संजय के आंख से कैसे देख सकता है वो.." "इसका मतलब ये है कि उस समय तकनीक थी… बीच में क्या हुआ, नहीं हुआ, बहुत कुछ बदला पर उस जमाने में इस देश में टेक्नोलॉजी थी.. यह काम आप लोगों ने पहले नहीं किया, इस देश में लाखों साल पहले यह अविष्कार हो चुका था।" कांग्रेस नेता संजय निरूपम, पीएम मोदी को अनपढ़ कहकर विवादित बयान दिया था। निरूपम ने कहा- ''मोदी जी पर कोई फिल्म बनी हो और ये दिखाने की जबरदस्ती की जा रही है ये सरासर गलत हैं…'जो बच्चे स्कूल, कॉलेज में पढ़ रहे हैं, उन्हें मोदी जैसे अनपढ़-गंवार के बारे में जानकर क्या मिलने वाला है? यदि कोई बच्चा पीएम की शैक्षणिक योग्यता के बारे में सवाल करेगा तो आप उसे क्या बताएंगे? लोगों को उनकी योग्यता नहीं पता है। किन ताकतों ने दिल्ली विश्विद्यालय पर दवाब डाला, ताकि उनकी डिग्री जारी ना की जाए। जबकि उन्होंने दावा किया था वह वहां पढ़ चुके हैं?'' नरेश अग्रवाल ने बीजेपी में शामिल होने के बाद जया बच्चन को फिल्मों में नाचने वाली’ बताया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी ने सिर्फ फिल्मों में नाचने वाली की वजह से उनका राज्यसभा टिकट काटा है। भारतीय समाज पार्टी के नेता ओपी राजभर ने कहा था, "बीजेपी में वोट लेने की बड़ी माया है.. ये लोग हर बिरादरी के बंदर पकड़ लेते हैं…हर बिरादरी में बंदर हैं..ये बंदर हेमामालिनी की तरह नाचते हैं…समाज वोट देता है उसके बाद सब खत्म…." केशव और स्वामी प्रसाद मौर्य जैसे पिछड़े समाज के नेताओं की फोटो तब लगनी शुरू होगी जब चुनाव आएगा..अभी तो इन लोगों का सिर्फ इस्तेमाल हो रहा है…थोड़ा-थोड़ा ये लोग जोर लगाते तब हम तो टिका ही देते हैं… लेकिन ये लोग इस डर से नहीं बोलते हैं कि कहीं कुर्सी न चल जाए…आवाज लगानी चाहिए इन्हें.. नेता किस बात का जब वो बोलेगा नहीं? गूंगा, बहरा व्यक्ति नेता नहीं होता"। -
भाजपा के विधायक सुरेंद्र सिंह।
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अलवर में चुनाव प्रचार के आखिरी दिन शरद यादव ने वसुंधरा राजे को ‘मोटी’ बताया था और कहा था कि उन्हें आराम देने की जरूरत है। शरद यादव के इस बयान की चौतरफा निंदा हुई। वसुंधरा राजे ने पलटवार किया था। उन्होंने कहा था कि, ‘मैं अपमानित महसूस कर रही हूं, ये सभी महिलाओं का अपमान है।