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SP Supremo Mulayam Singh Yadav and father of Akhilesh Yadav: सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के परिवार वाले उत्तर प्रदेश में होने जा रहे त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव (UP Panchayat Chunav 2021) में नई आरक्षण नीति लागू होने से अब सैफई (Saifai) ब्लॉक प्रमुख सीट पर चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। सैफई ब्लॉक प्रमुख की सीट एससी महिला के लिए आरक्षित कर दी गई है, लेकिन एक समय ऐसा था जब सैफई वालों ने ‘नेताजी’ को एमएलए बनाने के लिए अन्न तक त्याग दिया था।
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बात मुलायम सिंह यादव के राजनीति में प्रवेश से पहले की है, जब सैफई गांव वालों ने उनके चुनाव लड़ने के लिए पैसा जुटाने में मदद की थी।
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मुलायम सिंह चुनाव लड़ने के लिए पैसे जमा कर रहे थे लेकिन रुपये की कमी बनी हुई थी। सैफई वाले भी चाहते थे कि मुलायम विधायक बनें।
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रुपये का जुगाड़ न हो पाने की स्थिति में तब मुलायम सिंह ने एक बार अपने घर की छत पर एक बैठक की। इसमें गांव से हर कोई एकत्र हुआ था।
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सैफई गांव के प्रधान रह चुके दिवंगत दर्शन सिंह यादव के नाती अंकित यादव ने न्यूज18 को बताया था कि बैठक में सभी ने अन्न त्याग का निर्णय लिया।
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गांव वालों ने कहा था कि मुलायम सिंह उनके हैं और उनको चुनाव लड़ाने के लिए गांव वाले एक शाम खाना नहीं खाएंगे, क्योंकि एक दिन खाना छोड़ने से आठ दिनों तक मुलायम सिंह की गाड़ी चल सकती थी।
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गांव वालों की मदद से मुलायम सिंह यादव ने रुपये जमा किए और चुनाव लड़े थे। मुलायम सिंह यादव को राजनीति में लाने का श्रेय उस समय के कद्दावर नेता नत्थू सिंह को दिया जाता है।
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चौधरी नत्थू सिंह ने कभी मुलायम सिंह के लिए अपनी सीट छोड़ दी थी। बता दें कि नेता नत्थू सिंह ने मुलायम सिंह को चुनाव लड़वाया था और सबसे कम उम्र में विधायक बनवाने में बहुत मदद की थी।
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बता दें कि, मुलायम सिंह का बचपन अभावों में बीता था, लेकिन उनकी फुर्ती की चर्चा आज भी सैफई में होती है। लोग बताते हैं कि वह अक्सर पेड़ों पर चढ़ जाते थे और आम, अमरूद, जामुन आदि तोड़कर अपने साथियों को खिलाते थे।
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बता दें कि मुलायम सिंह यादव ने मैनपुरी के जिस कॉलेज में पढ़ाई की, बाद में उसी कॉलेज में पढ़ाने लगे थे। (All Photos: PTI And Indian Express)