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हर बार दिवाली को लोग काफी उत्साह के साथ मनाते हैं। सभी लोग इस दिन ज्यादा से ज्यादा पटाखे फोड़कर खुश होना चाहते हैं। लेकिन खुशी के इस इजाहर में वे लोग ये भूल जाते हैं कि वे लोग जिन पटाखों को फोड़ रहे हैं उनमें काफी सारे कैमिकल मौजूद हैं जो उनके साथ-साथ बाकी लोगों की सेहत के लिए भी नुकसान दायक होते हैं। पटाखे बनाने के लिए मेटल, नाइट्रोजन गैस के ऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और कई तरह की जानलेवा कैमिकल का इस्तेमाल होता है। इस तरह के कैमिकल की मदद से ही पटाखों में से तरह-तरह के रंग निकलते हैं। लेकिन इन सब का हमारे शरीर पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है। जानिए किस कलर का क्या होता है नुकसान।
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चमकीले इफेक्ट- इसके लिए सलफाइड का इस्तेमाल होता है। इससे हमें सांस लेने में दिक्कत होती है।
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नीला कलर- इसके लिए टॉपर कंपाउंड का इस्तेमाल होता है। इससे कैंसर, स्किन बीमारियां और हार्मोनल असंतुलन होता है।
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लाल कलर- इसमें स्ट्रोन्टियम और लिथियम कंपाउंड का इस्तेमाल होता है। इससे बच्चों के शारिरीक विकास में बाधा उत्पन्न होती है। सांस लेने में दिक्कत होती है।
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सफेद कलर- यह एल्मूमीनियम से बनता है। इसमे स्किन से जुड़ी परेशानी हो सकती है। इससे अल्जाइमर भी हो सकता है।
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हरा कलर- इसमें बेरियम नाइट्रेट का इस्तेमाल होता है। जिसकी वजह से सांस संबंधी परेशानियां, पेट और आंतो से जुड़ी बीमारियां और मांसपेशियों में कमजोरी होती है।