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अनिल धीरूभाई अंबानी की कंपनी पर दिन व दिन कर्ज बढ़ता ही जा रहा है। 18 जून को शेयर बाजार बंद होने पर अनिल अंबानी के नियंत्रण वाली रिलायंस की कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 5400 करोड़ रुपये के करीब था। इससे अब वह देश के अरबपतियों की लिस्ट से बाहर हो गए हैं। जबकि चार महीने पहले यह आंकड़ा 8 हजार करोड़ रुपये का था। अनिल अंबानी अपनी छह कंपनियों- रिलायंस नेवल ऐंड इंजीनियरिंग, रिलायंस पावर, रिलायंस कैपिटल, रिलायंस होम फाइनेंस, रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर और अब बंद हो चुकी रिलायंस कम्युनिकेशन में 75 फीसदी से कम हिस्सेदारी पर नियंत्रण रखते हैं। कंपनियों की मार्केट वैल्यू के आधार पर देखें तो अब उनके पास 1 बिलियन डॉलर से काफी कम ही संपत्ति बची है। कर्ज में डूबे रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी समूह के प्रमुख अनिल अंबानी ने 11 जून को कहा था कि उनका समूह ऋण को न्यूनतम स्तर पर लाएगा। समूह ने पिछले 14 महीनों में 35,400 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाया है और भविष्य में वह सभी देनदारियों को समय से पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। अनिल अंबानी का कहना है कि चुनौतीपूर्ण हालातों और वित्तपोषकों से कोई वित्तीय सहायता नहीं मिलने के बावजूद उनके समूह ने एक अप्रैल, 2018 से लेकर 31 मई, 2019 के बीच अपने ऊपर बकाया ऋण में 24,800 करोड़ रुपये मूलधन और 10,600 करोड़ रुपये ब्याज का भुगतान किया है। अनिल अंबानी का नाम कभी देश के 6 अरबपतियों की लिस्ट में था। आइए जानते हैं कैसे दुनिया के शीर्ष धनाड्यों की लिस्ट से बाहर हो गए अनिल अंबानी: (All Pics- PTI)
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जानकार बताते हैं कि रिलायंस समूह पर करीब एक लाख करोड़ रुपये का कर्ज अभी भी बकाया है। इसलिए वह अपनी कंपनियां बेचकर धन जुटाने में लगे हैं। कुछ महीने पहले एरिक्सन का बकाया नहीं चुकाने के चलते अनिल अंबानी को जेल की सजा होने वाली थी, उस वक्त बड़े भाई मुकेश अंबानी ने उनकी मदद की और वह जेल जाने से बच गए।
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हाल ही में अनिल अंबानी ने अपने रेडियो स्टेशन और म्यूचुअल फंड कारोबार को बेचा है। वहीं साधारण बीमा कारोबार की बिक्री के लिए बातचीत चल रही है। हालांकि पिछले दिनों अनिल अंबानी कह चुके हैं कि रिलायंस समूह की रिलायंस पावर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के शेयर में हो रही तेजी से गिरावट की वजह अफवाहें और अटकलें हैं।
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एक समय अनिम अंबानी देश के शीर्ष अरबपतियों की लिस्ट में थे लेकिन पिछले पांच साल में उनकी संपत्ति लगातार घट रही है। इसकी वजह उनकी समूह की कंपनियों पर बढ़ता कर्ज है। जनवरी से अब तक उनके समूह की सूचीबद्ध कंपनियों के शेयर 65 प्रतिशत से अधिक गिर चुके हैं। 2008 में अनिल अंबानी दुनिया के सबसे अमीर लोगों की लिस्ट में छठवें पायदान पर थे। उस समय उनकी संपत्ति कुल 42 बिलियन डॉलर थी और अब उनके पास 1 बिलियन डॉलर से भी कम पूंजी रह गई है।
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अनिल अंबानी ने रिलायंस ग्रुप के इस संकेट के लिए नियामकीय संस्थानों और अदालतों को भी जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में फैसला देरी से आया जिसकी वजह से समूह को 30,000 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया नहीं मिल पाया।
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अनिल अंबानी की आज ये स्थिति है, इसकी सबसे बड़ी वजह एरिक्सन इंडिया का बकाया है। मामला सुप्रीम कोर्ट से भी हार जाने के बाद 550 करोड़ पर अदालत के बाहर रजामंदी हुई। पर इतना भी नहीं दे पाने की स्थिति में जेल जाने की नौबत आ गई थी। फिर बड़े भाई मुकेश अंबानी ने मदद की थी। इसके अलावा अनिल की तमाम कंपनियों की शेयर मार्केट वेल्यू गिरने लगी, इंवेस्टर्स का भरोसा टूटने लगा।
अनिल मानते हैं कि वित्तीय प्रणाली ने समूह के प्रति पूरी तरह उदासीनता बरती और कहीं से भी कोई समर्थन नहीं मिला जिसका परिणाम यह हुआ कि इससे ऋणदाताओं और अन्य हितधारकों को नुकसान हुआ। अब देखना यह होगा कि क्या अनिल अंबानी फिर से अपने उसी मुकाम पर पहुंच पाएंये, क्या वे अपना कर्ज चुकाकर भी वो सब हासिल कर पाएंगे, जिसे उन्होंने बेचा है।