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बॉलीवुड ने हमें कई ऐसे डायलॉग्स दिए जो सदाबहार हो गए, और आजतक हमारी जुबान पर चढ़े हुए हैं। कुछ डायलॉग्स बेहद गंभीर तो कुछ ऐसे मजाकिया कि हम अकसर बातचीत में उनका इस्तेमाल कर लेते हैं। एक नजर बॉलीवुड के कुछ ऐसे ही बेहतरीन डायलॉग्स पर- कौन कमबख्त कौन कमबख्त पीता है जो लेने बर्दाश्त करने के लिए पीता है मैं तो पीता हूं कि केवल सांस चले। देवदास फिल्म का ये डायलॉग आज भी महफिलों में सुनाई पड़ता है।
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प्यासा फिल्म का डायलॉग, जब हम चले तो साया भी अपना साथ ना दे, जब तुम चलो जमीं चले आसमां चले। ये डायलॉग स्ट्रगलिंग लवर्स के लिए एक बेहतरीन लाइन हो सकती है।
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मुगल-ए-आजम का एक एक डायलॉग जानदार था। लेकिन उसमें ये डायलॉग सलीम और अनारकली के चेहरे भूलने नहीं देता।
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राजकुमार के खास अंदाज में ये डायलॉग, चिनॉय सेठ छुरी बच्चों के खेलने की चीज नहीं होती, हाथ कट जाए तो खून निकल आता है।
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पुष्पा आई हेट टियर्स, आनंद के इस डायलॉग के जैसा तो आजतक कभी नहीं हुआ।
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पाकीजा फिल्म का डायलॉग, आपके पांव देखे, बहुत हसीन हैं, इन्हें जमीन पर मत रखिएगा मैले हो जाएंगे…प्यार की एक अलग ही परिभाषा देता है।
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दंबग में सोनाक्षी का जबर्दस्त डायलॉग, थप्पड़ से डर नहीं लगता साहब, प्यार से लगता है
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प्रेम चोपड़ा के डायलॉग 'जिनके घर शीशे के होते हैं वो बत्ती बुझा के कपड़े बदलते हैं' को बतौर जोक आज भी इस्तेमाल किया जाता है।
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क्या कर रहा है यार, मर्द बन, बी ए मैन- दिल चाहता है