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'उड़ता पंजाब' फिल्म की वजह से सेंसर बोर्ड चीफ पहलाज निहलानी सुर्खियों में हैं। आज उनकी छवि एक ऐसे कठोर शख्स की बन गई है, जिसे फिल्ममेकर्स की मेहनत पर कैंची चलाने में मजा आता है। उनसे जुड़े जोक्स सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं। हालांकि, उनसे जुड़ी तमाम दिलचस्प बातों से आम पाठक अनजान है। आइए, जानते हैं, उनसे जुड़ी ऐसी ही दिलचस्प जानकारी: (सभी फोटो: Express Archive)
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अगर फिल्म मेकर की काबिलियत इस बात में है कि उसने इंडस्ट्री में कितने साल बिताए हैं तो बेशक निहलानी एक काबिल व्यक्ति हैं। 66 साल के निहलानी ने अपने करियर की शुरुआत 1954 के आसपास की थी।
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निहलानी एक अमीर सिंधी संयुक्त परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके परिवार के पास पॉलिथीन और धागे समेत कई तरह के बिजनेस थे। इस वजह से उनका पढ़ाई लिखाई में बहुत ज्यादा मन नहीं लगा।
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निहलानी ने द इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू को बताया, 'पढ़ाई के बजाए मैं स्कूल छोड़ना सुबह छह बजे वाला शो देखने लालबाग के जयंत सिनेमा जाता था। यह जल्दी खुल जाता था क्योंकि इसके दर्शक अधिकतर मिल मजदूर थे। '
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'मैंने पहली फिल्म जो देखी वो मधुमती थी। मैंने यह फिल्म दादर के ब्रॉडवे में देखा था।' फिल्मों को अपनी हॉबी बताने वाले निहलानी का कहना है कि उनकी बचपन से सामाजिक कार्यों में दिलचस्पी थी। निहलानी के मुताबिक, उन्होंने दस साल की उम्र से चैरिटी के कामों में दिलचस्पी लेनी शुरू कर दी।
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निहलानी ने बताया कि वे आपदा प्रभावित इलाकों या दूसरे कारणों से फंड जुटाने में मदद करते थे। 1955 में ऐसे ही एक इवेंट में उन्होंने चेतन आनंद की फिल्म फंटूश को दिखाने के राइट्स मांगे। इसी से फिल्म वितरण के क्षेत्र में उन्होंने कदम रखा।
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निहलानी कई सालों तक डिस्ट्रीब्यूटर के तौर पर काम करते रहे। वे निजी तौर पर दारा सिंह के एक्शन फिल्मों और कुछ अन्य मशहूर फिल्मों के प्रिंट लेकर मुंबई के ग्रांट रोड स्थित नाज बिल्डिंग से निकलते थे। यह इमारत कभी बॉलीवुड के सबसे ताकतवर डिस्ट्रीब्यूटर्स और फायनेंसर्स के घर के तौर पर जानी जाती थी।
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1975 में निहलानी ने अपनी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी खोली। इसके अलावा, फिल्में भी प्रोड्यूसर करनी शुरू कीं। इनमें शोला और शबनम, दिल तेरा दीवाना, आंखें और अंदाज जैसी फिल्में शामिल हैं।
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भले ही निहलानी की 90 के दशक में प्रोड्यूस की गई फिल्मों को बी ग्रेड दर्जे की मानी जाती हों, लेकिन वीनस वर्ल्डवाइड एंटरटेनमेंट के रतन जैन का कहना है कि वे अपने वक्त के सबसे कामयाब फिल्म प्रोड्यूसर्स में से एक थे।
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रतन जैन का कहना है, 'पहलाज प्रकाश मेहरा नहीं थे, लेकिन उन्होंने सबसे बड़े नामों के साथ काम किया। इनमें धर्मेंद्र, अनिल कपूर, करिश्मा कपूर जैसे लोग हैं। उन्होंने गोविंदा और नीलम जैसे कई लोगों को लॉन्च किया।
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अपनी फिल्मों को बी ग्रेड कहे जाने से नाराज निहलानी का कहना है कि वे उनके प्रोडक्शन हाउस से अधिकतर फैमिली एंटरटेनर फिल्में ही निकली हैं। वे सभी बड़े स्टार वाली हिट फिल्में थीं।
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डेविड धवन और अनीस बजमी ने बतौर डायरेक्टर अपना करियर निहलानी के साथ ही शुरू किया।'निहलानी ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा, 'मैं किसी एक्टर या टेक्नीशियन को कभी साइन नहीं किया। मेरी जुबान ही काफी थी। फिल्म के रिलीज होते ही जैसे ही कमाई शुरू होती थी, हम उनको पेमेंट देते थे।'

निहलानी कभी खुद सेंसर बोर्ड से किसी जमाने में भिड़ गए थे। नाम न बताने की शर्त पर इंडस्ट्री के एक शख्स ने बताया कि निहलानी अपनी फिल्मों के सर्टिफिकेशन के लिए खुद बोर्ड के पास जाते थे और घंटों इंतजार करते थे। उसने बताया, 'एक बार निहलानी सेंसर बोर्ड चीफ से भिड़ गए थे। उनकी फिल्म अंदाज (1994) में साइकिल चलाती हीरोईन के स्कर्ट के नीचे शॉर्ट्स नजर आने के दृश्य पर बोर्ड ने आपत्ति जताई। निहलानी इस सीन को हर हाल में फिल्म में चाहते थे।' -
उनकी फिल्म 'राजा बाबू' के गाने 'सरकाय लेयो खटिया' के द्विअर्थी होने को लेकर सेंसर बोर्ड ने आपत्ति जताई थी। लेकिन निहलानी इस गाने को पास कराने के लिए फिल्म सर्टिफिकेशन एपेलेट ट्रिब्यूनल तक गए।
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निहलानी ने बताया, 'तत्कालीन सेंसर बोर्ड चीफ शक्ति सामंथ ने फिल्म देखने के बाद उसे ग्रीन सिग्नल दे दिया। लेकिन दिवंगत बीजेपी नेता गोपीनाथ मुंडे इसके खिलाफ थे। उन्होंने इस पर बैन के लिए प्रदर्शन किया। मामला मंत्रालय चला गया। हालांकि, उन्होंने आपत्ति नहीं की, मैंने उन्हें कहा कि मैं स्वेच्छा से इन गाने को डिलीट कर दूंगा। बताइए, आज फिल्ममेकर ऐसा करेगा।'