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बॉलीवुड की तमाम हस्तियां IIFA Awards 2017 इवेंट में शिरकत करने के लिए न्यूयॉर्क रवाना हो चुकी हैं। आज सुबह से ही मुंबई एयरपोर्ट पर IIFA Awards में जाने वाले सेलिब्रिटीज की खासी भीड़ देखने को मिली। जहां पर बॉलीवुड के बड़े- बड़े स्टार्स शिरकत करने के लिए गए हैं। लेकिन आज हम यहां बीते दौर के उन सुपरस्टार्स की बात कर रहे हैं जो नई जनरेशन के आगे फीके पड़ गए हैं। बता दें कि गुजरे जमाने में इन सुपरस्टार्स ने भी अपनी बेहतरीन अदाएगी के दम पर लाइफ अचीवमेंट अवॉर्ड को अपने नाम किया है। देखिए हिंदी सिनेमा में अपना योगदान करने वाले इन सुपरस्टार्स की कुछ यादगार तस्वीरें।
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बॉलीवुड फिल्मों के दिग्गज कलाकार दिलीप कुमार को सिंगापुर में 2004 में आउटस्टैंडिंग लाइफ अचीवमेंट के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। अभिनेता बड़े पर्दे पर अंतिम बार साल 1998 में फिल्म ‘किला’ में नजर आए थे। दिलीप कुमार को 1998 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार और 2015 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। दिलीप कुमार को उनके दौर का बेहतरीन अभिनेता माना जाता है, फिल्मों में दुखी भूमिकाओं के लिए मशहूर होने के कारण उन्हे 'ट्रेजिडी किंग' भी कहा जाता हैं। उन्हें भारतीय फिल्मों के सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, इसके अलावा दिलीप कुमार को पाकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान निशान-ए-इम्तियाज से भी सम्मानित किया जा चुका है।
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पिता सुनील दत्त के साथ संजय दत्त की एक तस्वीर।
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बीते दौर की जानी-मानी अदाकारा शबाना आजमी को अपने करिअर के काफी लंबे समय बाद ये अवॉर्ड मिला। आजमी ने 1976 में आई श्याम बेनेगल की फिल्म निशांत, 1977 में आई फिल्म शतरंज, 1982 में महेश भट्ट की फिल्म अर्थ, शेखर कपूर की मासूम और 1996 की फिल्म फायर में अपनी बेहतरीन भूमिका पेश की है। ये वो फिल्में हैं, जिनमें उनकी अदाएगी को काफी सराहा गया था। आजमी काफी लंबे समय तक इस अवॉर्ड को पाने के लिए इतंजार करती रहीं, लेकिन 2005 में उन्हें अमृतसरधाम में इस अवॉर्ड से नवाजा गया।

आशा पारेख अपने दौर में अभिनय और खूबसूरती में सरताज रहीं हैं। हाल ही आशा पारेख ने अपनी ऑटोबायोग्राफी को लॉन्च किया है। हिंदी सिनेमा में आशा पारेख का भी काफी योगदान रहा है। आशा को 2006 में दुबई में इस अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है। आशा पारेख ने 1966 में आई विजय आनंद की फिल्म तीसरी मंजिल, प्रमोद चक्रवर्ती की फिल्म lOve in Tokyo, शक्ति सामंता की फिल्म कटी पतंग जैसी फिल्में की हैं। ये फिल्में अब भी टीवी पर आएं तो हर किसी की नजरें इन पर बिना टिके नहीं रह सकती। -
जय वीरु की कहानी कहने वाले अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र के बारे में तो सभी जानते हैं। 2007 में धर्मेंद्र को भी इस अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। धर्मेंद्र को ये अवॉर्ड को उनके रियल और रील स्क्रीन वाले दोस्त अमिताभ बच्चन से मिला। इस दौरान उनके दोनों बेटे बॉबी देओल और सनी देओल साथ नजर आए थे।

गोल्डन इरा की एक्ट्रेस मुमताज को भला कोई कैसे भूल सकता है। मुमताज का नाम भी इस अवॉर्ड लिस्ट में काफी लंबे समय बाद आया। उन्हें ये अवॉर्ड 2008 में बैंकॉक में आयोजित अवॉर्ड सेरेमनी में दिया गया। उन्होंने 1967 में फिल्म राम और श्याम से अपने फिल्मी करिअर की शुरुआत की थी। 1969 में आई दो रास्ते और 1973 में आई फिल्म लोफर उनके करिअर की बेस्ट फिल्में हैं। 
शर्मिला टैगोर भी अपने दौर की एक बेहतरीन अदाकराओं में से एक रहीं। उनका नाम भी इस अवॉर्ड लिस्ट में लेट शामिल हुआ। उन्हें 2011 में कनाडा की राजधानी टोरंटों में ये अवॉर्ड मिला। उनके करिअर की फिल्म शक्ति सामंता कि फिल्म कश्मीर की कली, ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म अनुपमा, An Evening In Paris और आराधना काफी मशहूर हैं। 
एवरग्रीन ब्यूटी रेखा अब भी फिल्मों में सक्रीय है। काफी लंबे समय से वे अपना योगदाव हिंदी सिनेमा देते आ रही हैं। रेखा भी इस अवॉर्ड से अछूती नहीं रहीं। उन्हें 2012 में सिंगापुर में ये अवॉर्ड मिला। रेखा को ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म नमक हलाल, 1980 में आई खूबसूरत, 1980 की उमरावजान और 1981 की फिल्म सिलसिला में अभिनय के लिए ये अवॉर्ड दिया गया।