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42 साल से जिंदगी मेरे लिए अभिशाप बन गई है। यह कहना है इस गुनहगार सोहनलाल वाल्मीकि का जिसने अपनी पाशविक हरकत से नर्स अरुणा शानबाग की जिंदगी को चार दशक का नरक बना दिया। यह दोषी आज भी जिंदा है और राजधानी दिल्ली से कुछ दूर हापुड़ के एक गांव में रहता है। (फोटो: गजेंद्र यादव)
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यह है सोहनलाल वाल्मीकि का हापुड़ के एक गांव में घर। पहले सोहनलाल ने बताया था कि उसे अरुणा के निधन की खबर दिल्ली के एक रिश्तेदार ने मोबाइल पर सुनाई थी। बाद में उसने कहा कि एक पत्रकार ने यह सूचना दी। किसी ने उससे कहा, उस पर नए सिरे से आरोप तय होकर मुकदमा चलाया जा सकता है। इस अंदेशे से वह बुरी तरह से डरा हुआ है। (फोटो: गजेंद्र यादव)
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अपने दुष्कर्म को याद करते हुए सोहनलाल वाल्मीकि कहता है कि: मैंने मांस खाना छोड़ दिया। बीड़ी, शराब पीने जैसी बुरी आदतें छोड़ दीं। सजा मिलने के पहले मेरे एक बेटी थी। जब मैं जेल में था, वह मर गई। वह मरी इसलिए कि मैंने पाप किया था। जेल से छूटने के बाद कई साल तक मैं अपनी पत्नी के पास तक नहीं गया। जेल से निकलने के चौदह साल बाद मेरे बेटा पैदा हुआ था। (फोटो: गजेंद्र यादव)
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अपमान और तानों से भरी अपनी बीती जिंदगी को याद करते हुए सोहनलाल ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा: यह सब अरुणा दीदी के साथ ‘हादसे’ के कारण हुआ। मुझे बहुत पछतावा है। मैं उनसे और अपने भगवान से माफी मांगता हूं। (फोटो: गजेंद्र यादव)
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यह है सोहनलाल वाल्मीकि का छोटा बेटा रविंदर। बेटे ने कहा उसे अपने पिता की इस हरकत के बारे में तब पता चला जब वह महज 12 साल का था। (फोटो: गजेंद्र यादव)
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यह है सोहनलाल वाल्मीकि का बड़ा बेटा किशन। अपने जघन्य अपराध के लिए सोहनलाल को सात साल की कैद मिली जो उसने पुणे के येरवडा जेल में काटी। (फोटो: गजेंद्र यादव)
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सोहनलाल दोनों बेटों के साथ मेहनत मजदूरी करता है। अरुणा के साथ हुई जघन्य घटना के बाद रविंदर का जन्म हुआ था। सात साल की सजा काटने के बाद सोहनलाल जिस दादूपुर गांव में रहा था, वहां उसे लोगों ने बहुत परेशान किया। सोहनलाल के कुकर्म के बाद बनी स्थिति के चलते बेटे ज्यादा पढ़ लिख नहीं पाए और परिवार अभी भी गरीबी में दिन बिता रहा है। सोहनलाल की एक बेटी की शादी होनी अभी बाकी है। (फोटो: गजेंद्र यादव)
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अरुणा शानबाग का जिक्र छिड़ते ही वह कहता है,‘अब क्या है… कहानी खत्म हुई। अब क्या पूछेंगे आप…मैं तो बस अपना बचा हुआ वक्त काट रहा हूं। मजदूरी करता हूं।’ (फोटो: गजेंद्र यादव)