भारत ने समुद्री जासूसी विमान बनाने वाली कंपनी बोइंग से करीब एक बिलियन डॉलर में चार विमानों का ऑर्डर दिया है। न्यूज एजेंसी रायटर्स को रक्षा सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, भारत हिंद महासागर में चीन की उपस्थिति पर नजर रखने के लिए नौसेना को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। लंबी रेंज के P-8I एयरक्राफ्ट्स में से 8 को पहले ही हिंद महासागर में पनडुब्बियों की गतिविधि का पता लगाने के लिए तैनात किया गया है। रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने पहचान जाहिर न करने की शर्त पर रायटर्स को बताया, ”यह एक फॉलो-अप ऑडर है, जिस पर आज (बुधवार) हस्ताक्षर किए गए। एक और अधिकारी ने पुष्टि की कि कॉन्ट्रैक्ट करीब एक बिलियन डॉलर का है और अगले तीन साल के भीतर एयरक्राफ्ट की सेवाएं मिलने लगेंगी। भारत में बाेइंग डिफेंस, स्पेस और सिक्योरिटी की प्रवक्ता अमृता ढिंडसा ने कहा कि वह कॉन्टैक्ट के बारे में कुछ हर पाने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने सभी सवालों के जवाब रक्षा मंत्रालय से मांगने को कहा। लेकिन उन्होंने यह बताया कि P81 एयरक्राफ्ट न सिर्फ लंबी दूरी की निगरानी के लिए इस्तेमाल किया जाता है, बल्कि यह एंटी-सबमरीन हारपून मिसाइल से भी लैस है। चीन के हिंद महासागर में बढ़ती गतिविधियों के बाद भारत ने अपनी नौसेना की सर्विलांस क्षमताओं में वृद्धि की है। चीन ने पिछले दिनों हिंद महासागर में पनडुब्बियां और एक परमाणु ऊर्जा वाली नाव श्रीलंका तट पर भेजी थी।
यह डील अमेरिका के अंडर सेक्रेट्री ऑफ डिफेंस फॉर एक्विसिशन, फ्रैंक केंडल की यात्रा के दौरान साइन की गई है। इससे भारत-अमेरिका के बीच रिश्तों में और मजबूती आई है। भारत की ज्यादा सैन्य सप्लाई रूस से हाेती रही है, लेकिन हाल के वर्षों में अमेरिका शीर्ष हथियार सप्लायर के तौर पर उभरा है। बोइंग ने 2.1 बिलियन डॉलर के पिछले ऑर्डर के तहत आखिरी एयरक्राफ्ट की डिलीवरी 2015 में की थी। नौसेना ने P8-I एयरक्राफ्ट्स में से कुछ को सुदूर अंडमान और निकोबार द्वीप में तैनात किया है।
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