New Labour Code Explainer: मोदी सरकार ने चार नए लेबर कोड देश में लागू कर दिए हैं। जानकार इसे एक बड़े रिफॉर्म के तौर पर देख रहे हैं, लेकिन आम लोगों के मन में सिर्फ एक सवाल है-इन नए लेबर कोड से उन्हें क्या फायदा मिलने वाला है। इसी को समझने के लिए इन कोड्स को सरल भाषा में जान लेते हैं।

नई लेबर कोड्स क्यों जरूरी थे?

सरकार के मुताबिक नए लेबर कोड का उद्देश्य श्रमिक समुदाय तक सीधा फायदा पहुंचाना था। सरकार का कहना है कि अब कोई भी मजदूर, चाहे वह फैक्ट्री में काम करता हो या किसी ऐप आधारित कंपनी जैसे कैब सर्विस या फूड डिलीवरी से जुड़ा हो, इन कोड्स के जरिए वेतन, सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ पाएगा। सरकार इस बात पर भी जोर दे रही है कि फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयीज को केवल एक साल की नौकरी पर ही ग्रेच्युटी मिलने लगेगी, जबकि पहले पांच साल की नौकरी अनिवार्य थी। महिलाओं को लेकर भी कोड में खास प्रावधान हैं, जिनमें एक जैसे काम के लिए एक जैसा वेतन सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

पहले कितने लेबर कोड थे और अब कितने कर दिए गए?

देश में अभी तक 29 श्रम कानून चल रहे थे, जिन्हें समझना और लागू करना जटिल था। मोदी सरकार ने इन 29 कानूनों को समेटकर अब सिर्फ चार व्यापक लेबर कोड बना दिए हैं-वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यस्थल स्थिति संहिता 2020। सरकार का दावा है कि इससे न केवल श्रमिकों को फायदा होगा बल्कि उद्योग जगत के लिए नियम अधिक स्पष्ट और सरल भी होंगे।

निश्चित अवधि वाले कर्मचारियों को क्या फायदा होगा?

निश्चित अवधि वाले कर्मचारी, जिन्हें फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयीज़ भी कहा जाता है, अब परमानेंट कर्मचारियों जैसी कई सुविधाओं के हकदार होंगे। नए लेबर कोड के बाद उन्हें छुट्टी, मेडिकल सुविधा और सामाजिक सुरक्षा का पूरा दायरा मिलेगा। सबसे बड़ी राहत यह है कि अब ये कर्मचारी अपने कार्यकाल का सिर्फ एक साल पूरा करने के बाद ही ग्रेच्युटी के पात्र हो जाएंगे, जबकि पुराने नियमों के तहत इसके लिए पांच साल काम करना जरूरी था। इस बदलाव से निश्चित अवधि वाले कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा पहले से मजबूत होगी।

गिग और प्लेटफॉर्म कर्मचारियों को क्या फायदा?

नई लेबर कोड की एक बड़ी खासियत यह है कि सरकार ने पहली बार गिग वर्कर और प्लेटफॉर्म वर्कर की स्पष्ट परिभाषा तय की है। इसका मतलब यह है कि ऐप आधारित काम करने वाले लोग जैसे कैब ड्राइवर या फूड डिलीवरी पार्टनर अब औपचारिक रूप से कर्मचारियों की श्रेणी में आएंगे। पहले इन्हें कर्मचारी नहीं माना जाता था, इसलिए इन्हें पीएफ, ईएसआई, मेडिकल सुविधाएं या किसी भी प्रकार की सामाजिक सुरक्षा नहीं मिलती थी। अब ऐप आधारित कंपनियों को अपनी कमाई का एक से दो प्रतिशत गिग वर्कर्स की वेलफेयर स्कीम्स पर खर्च करना अनिवार्य होगा। इन वर्कर्स को जल्द ही आधार से जोड़ा जाएगा और यूनिवर्सल अकाउंट नंबर दिया जाएगा, जिससे वे किसी भी राज्य में जाएं, उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ लगातार मिलता रहेगा।

महिला कर्मचारियों को क्या फायदा होगा?

नई लेबर कोड में महिलाओं के लिए कई अहम प्रावधान शामिल किए गए हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है समान काम के लिए समान वेतन का प्रावधान, जिससे महिलाओं और पुरुषों के वेतन में लंबे समय से चली आ रही असमानता कम होगी। इसके अलावा महिलाएं अब नाइट शिफ्ट में काम कर पाएंगी और खदानों तथा भारी मशीनों वाले क्षेत्रों में भी उनकी नियुक्ति की जा सकेगी, बशर्ते सुरक्षा इंतजाम पुख्ता हों। महिलाओं के लिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा भी बढ़ाया गया है, जिसमें उनके माता-पिता और सास-ससुर को भी आश्रित की श्रेणी में शामिल किया गया है।

कांट्रैक्ट वर्कर्स के लिए क्या फायदा?

कांट्रैक्ट वर्कर्स को भी नए लेबर कोड में बड़ी राहत दी गई है। अब उन्हें परमानेंट कर्मचारियों की तरह मेडिकल सुविधा, सामाजिक सुरक्षा और नियमित स्वास्थ्य जांच का लाभ मिलेगा। पहले ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों को इन सुविधाओं का लाभ नहीं मिलता था और उनके अधिकार भी स्पष्ट नहीं थे। नए कोड ने उनके अधिकारों को मजबूत बनाते हुए कई तरह की मनमानी और शोषण पर रोक लगाने की कोशिश की है।

युवा श्रमिकों को क्या फायदा मिलेगा?

नई नौकरी शुरू करने वाले युवाओं को भी इन कोड्स से कई लाभ मिलेंगे। अब उन्हें न्यूनतम मजदूरी की गारंटी मिलेगी और कंपनियों के लिए अपॉइंटमेंट लेटर देना अनिवार्य होगा। इससे नौकरी की शर्तें स्पष्ट होंगी और किसी भी तरह की मनमानी पर अंकुश लगेगा। इसके अलावा जितने घंटे काम करवाया जाएगा, उसके अनुसार वेतन देना अनिवार्य होगा। अगर ओवरटाइम करवाया जाता है, तो कर्मचारी को उसके लिए दोगुना वेतन मिलेगा।

क्या पत्रकारों को भी कोई फायदा मिलेगा?

पत्रकारों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े कर्मचारियों जैसे डबिंग आर्टिस्ट या वॉइस आर्टिस्ट को भी नई लेबर कोड में सामाजिक सुरक्षा के दायरे में शामिल किया गया है। साफ तौर पर कहा गया है कि अब ऐसे कर्मचारियों को अपॉइंटमेंट लेटर देना अनिवार्य होगा। इससे वेतन, अधिकारों और नौकरी की पारदर्शिता बढ़ेगी और उनके पेशे से जुड़ी कई निश्चितताएं कम होंगी।

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