उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने बुधवार को संविधान दिवस के मौके पर संंसद भवन के सेंट्रल हॉल में सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे संविधान की आत्मा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारत एक था, एक है और हमेशा एक रहेगा।
उन्होंने कहा कि संविधान हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, बलिदान, बुद्धिमत्ता और उन करोड़ों भारतीयों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है जिन्होंने आजादी के लिए अपना सब कुछ न्योछावर किया।
सीपी राधाकृष्णन ने संविधान निर्माण प्रक्रिया को याद करते हुए कहा कि मातृभूमि भारत के दूरदर्शी नेताओं ने गहन विमर्श और अद्वितीय दृष्टि के साथ संविधान का मसौदा तैयार किया। उन्होंने सामाजिक न्याय, कमजोर वर्गों के आर्थिक सशक्तिकरण और एक समतामूलक राष्ट्र के निर्माण को इसमें सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
जम्मू-कश्मीर और बिहार चुनावों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “अनुच्छेद 370 हटने के बाद 2024 में जम्मू-कश्मीर में भारी मतदान ने एक बार फिर दुनिया को भारत की लोकतांत्रिक शक्ति का एहसास कराया। वहीं हालिया बिहार चुनावों में रिकॉर्ड संख्या में महिलाओं की भागीदारी ने भारतीय लोकतंत्र के ताज में एक और अनमोल रत्न जोड़ दिया है।”
उपराष्ट्रपति सीपी राधा कृष्णन ने संविधान सभा में महिलाओं के योगदान को भी अविस्मरणीय बताया और कहा कि उनके विचार और दृष्टिकोण ने संविधान को और समृद्ध बनाया।उन्होंने दोहराया कि भारत का लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा और सबसे मजबूत लोकतंत्र है, जो हमारे संविधान की दृढ़ नींव पर खड़ा है।
उपराष्ट्रपति के संबोधन की बड़ी बातें
- उपराष्ट्रपति ने कहा – वैश्विक स्तर पर बदलते परिदृश्य में हमें चुनावी, सामाजिक, न्यायिक, वित्तीय जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सुधारों के लिए तैयार रहना चाहिए।
- उन्होंने कहा – हमारे संविधान निर्माताओं की भावना के अनुरूप हम सभी को इस ‘अमृत काल’ के दौरान ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में मिलकर काम करना चाहिए।
- उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्ण ने कहा- संविधान सामाजिक न्याय, कमजोर वर्गों के आर्थिक सशक्तीकरण के प्रति हमारी मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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