नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में केरल तट के करीब दो मछुआरों की हत्या के मामले में दो इतालवी मरीन के खिलाफ चल रहे मुकदमे से संबंधित सारी अदालती कार्यवाही बुधवार को स्थगित कर दी। शीर्ष अदालत ने यह आदेश समुद्री कानून से संबंधित अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण के अंतरिम आदेश के आलोक में दिया। न्यायाधिकरण ने इस मामले में भारत से यथास्थिति बनाए रखने और इस मामले में मुकदमा चलाने के देश के अधिकार के बारे में फैसला होने तक न्यायिक कार्यवाही स्थगित करने के लिए कहा था।

न्यायमूर्ति एआर दवे, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति अमिताव राय की खंडपीठ ने इस मामले की कार्यवाही पर रोक लगाने के लिए भारत और इटली के संयुक्त अनुरोध पर यह आदेश दिया। केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त महान्यायवादी पीएस नरसिम्हा ने कहा कि अधिकार क्षेत्र के मसले पर फैसला करने के लिए संभवत: एक महीने के भीतर पांच सदस्यीय न्यायाधिकरण गठित किया जाएगा। इतालवी मरीन मैसीमिलियानो लटोरे और सल्वाटोरे गिरोने की ओर से वरिष्ठ वकील सोली सोराबजी ने कहा कि एक अन्य न्यायाधिकरण द्वारा अधिकार क्षेत्र के मसले पर फैसला होने तक इसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया जाए। बाद में कोई भी पक्ष इसे उठा सकता है।

पीठ ने कहा- नहीं, हम अनिश्चिकाल के लिए स्थगित नहीं करेंगे। इसके साथ ही अदालत ने इस मामले को जनवरी 2016 के तीसरे हफ्ते में आगे सुनवाई के लिए स्थगित कर दिया। इससे पहले इटली ने शीर्ष अदालत से कहा था कि उसने उसके दो मरीन पर मुकदमा चलाने के भारत के अधिकार को अंतरराष्ट्रीय पंचाट में चुनौती दी है। अतिरिक्त महान्यायवादी ने कहा था कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय कंवेन्शन पर हस्ताक्षर किया है। इसलिए वह इस कार्यवाही में शामिल होगा।

ये दोनों मरीन एन्रिका लैक्सी जहाज पर सवार थे। इन दोनों पर आरोप है कि उन्होंने 15 फरवरी 2012 को केरल के तट के करीब समुद्र में दो भारतीय मछुआरों को समुद्री लुटेरा होने के भ्रम में गोली मार दी थी।