कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने मंगलवार को तीन तलाक पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की सराहना की और कहा कि बहुमत के आधार पर दिया गया यह फैसला लैगिक न्याय एवं पति-पत्नी को बराबरी का अधिकार देने की पुष्टि करने वाला है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मंगलवार को तीन तलाक पर दिए गए फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए वरिष्ठ वकील चिदंबरम ने ट्वीट किया, “तीन तलाक कुरान के वास्तविक सिद्धांतों में विकृति थी। अच्छा हुआ कि इसे असंवैधानिक करार दे दिया गया।
वहीं दूसरी ओर ऑल इंडिया मुस्लिम वूमेन पर्सनल लॉ बोर्ड और ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने तीन तलाक को लेकर मंगलवार को उच्चतम न्यायालय द्वारा दिये गये फैसले को इस्लाम और देश की मुस्लिम महिलाओं की जीत करार देते हुए कहा कि इससे तलाक के नाम पर मुसलमान औरतों के साथ होने वाली नाइंसाफी पर रोक लगने की उम्मीद है। ऑल इंडिया मुस्लिम वूमेन पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अम्बर ने ‘पीटीआई’ से बातचीत में कहा कि उच्चतम न्यायालय का फैसला मुस्लिम समाज के लिये ऐतिहासिक है। यह देश की मुस्लिम महिलाओं की जीत है, लेकिन उससे भी ज्यादा अहम यह है, कि यह इस्लाम की जीत है। उम्मीद है कि आने वाले वक्त में तीन तलाक को हमेशा के लिये खत्म कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि अब तक तीन तलाक की वजह से मुस्लिम औरतों पर जुल्म होते रहे हैं, जबकि इस्लाम में कहीं भी तीन तलाक की व्यवस्था नहीं है। यह सिर्फ कुछ तथाकथित धर्मगुरुओं की बनायी हुई अन्यायपूर्ण व्यवस्था थी, जिसने लाखों औरतों की जिंदगी बरबाद की है। इस फैसले से मुस्लिम औरतों को एक नई उम्मीद मिली है। शाइस्ता ने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय ने शरीयत से छेड़छाड़ किये बगैर छह महीने के अंदर संसद में कानून बनाये जाने की बात कही है। मुझे विश्वास है कि यह कानून बिना किसी दबाव के बनेगा और मुस्लिम महिलाओं को खुशहाली का रास्ता देगा।’’
