पूरा देश गणतंत्र दिवस मना रहे हैं। 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर राजधानी नई दिल्ली में कर्तव्य पथ पर भव्य परेड का आयोजन किया गया। इस बार गणतंत्र दिवस पर एक एक नई पहल के तहत कर्तव्य पथ पर बनायी गयी दर्शक दीर्घाओं के नाम भारत की नदियों के नाम पर रखे गए हैं जैसे गंगा, यमुना, कृष्णा, नर्मदा और पेरियार।
परेड स्थल के आसपास की सड़कों पर नियमित अंतराल पर ‘लेआउट मैप’ और बैनर लगाए गए हैं, ताकि अतिथियों को उनकी निर्धारित दीर्घाओं तक पहुंचने में सुविधा हो सके।
रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस महीने की शुरुआत में बताया था कि पारंपरिक व्यवस्था से हटकर इस बार दीर्घाओं को चिह्नित करने के लिए VVIP और अन्य ऐसे लेबल का इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसके बजाय, इन्हें भारत में बहने वाली नदियों के नाम दिए गए हैं।
किन-किन नदियों के नाम पर दीर्घाओं को नाम दिए गए?
इन दीर्घाओं में ब्यास, ब्रह्मपुत्र, चंबल, चिनाब, गंडक, गंगा, घाघरा, गोदावरी, सिंधु, झेलम, कावेरी, कोसी, कृष्णा, महानदी, नर्मदा, पेन्नार, पेरियार, रावी, सोन, सतलुज, तीस्ता, वैगई और यमुना शामिल हैं।
इसी तरह, 29 जनवरी को होने वाले ‘बीटिंग रिट्रीट’ समारोह के लिए दीर्घाओं के नाम भारतीय वाद्य यंत्रों पर रखे जाएंगे, जिनमें बांसुरी, डमरू, एकतारा, एसराज, मृदंगम, नगाड़ा, पखावज, संतूर, सारंगी, सारिंदा, सरोद, शहनाई, सितार, सुरबहार, तबला और वीणा शामिल हैं।
‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ
इस वर्ष के गणतंत्र दिवस समारोह का प्रमुख विषय ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ है। कर्तव्य पथ पर दीर्घाओं की पृष्ठभूमि में पुराने चित्र प्रदर्शित किए गए हैं, जो ‘वंदे मातरम्’ की शुरुआती पंक्तियों को दर्शाते हैं।
‘वंदे मातरम्’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में की थी। लाउडस्पीकरों पर ‘वंदे मातरम्’ के साथ-साथ ‘सारे जहां से अच्छा’, ‘कदम कदम बढ़ाए जा’ जैसे गीतों की धुनें बजाई गईं, जिससे पूरे माहौल में देशभक्ति का उत्साह और अधिक बढ़ गया। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा इस परेड के मुख्य अतिथि हैं। (इनपुट – भाषा)
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