राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संदेश में कमजोर वर्गों पर हो रहे अत्याचार पर चिंता जाहिर की और इसे राष्ट्रीय चरित्र के विरुद्ध बताया। मुखर्जी ने कहा कि हमारी स्वतंत्रता की 69वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर मैं देश विदेश में रह रहे अपने सभी बहनों और भाइयों को हार्दिक बधाई देता हूं। इन चार वर्षों में, मैंने कुछ अशांत, विघटनकारी और असहिष्णु शक्तियों को सिर उठाते हुए देखा है। हमारे राष्ट्रीय चरित्र के विरुद्ध कमजोर वर्गों पर हुए हमले पथभ्रष्टता है, जिससे सख्ती से निपटने की आवश्यकता है।

राष्ट्र के नाम संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि अपना 70वां स्वतंत्रता दिवस मनाते हुए, मैं हमारे स्वतंत्रता संग्राम के उन सभी ज्ञात और अज्ञात शूरवीरों को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं जिन्होंने हमें स्वतंत्रता दिलाने के लिए संघर्ष किया, कष्ट उठाया और अपना जीवन न्योछावर कर दिया महात्मा गांधी के ओजस्वी नेतृत्व से अन्तत: 1947 में अंग्रेजों को भारत छोड़ना पड़ा। 1947 में जब हमने स्वतंत्रता हासिल की, किसी को यह विश्वास नहीं था कि भारत में लोकतंत्र बना रहेगा तथापि सात दशकों के बाद सवा अरब भारतीयों ने अपनी संपूर्ण विविधता के साथ इन भविष्यवाणियों को गलत साबित कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे समूहों की अमानवीय, मूर्खतापूर्ण और बर्बरतापूर्ण कार्यप्रणाली हाल ही में फ्रांस, बेल्जियम, नाइजीरिया, केन्या और हमारे निकट अफगानिस्तान तथा बांग्लादेश में दिखाई दी है। ये ताकतें अब सम्पूर्ण राष्ट्र समूह के प्रति एक खतरा पैदा कर रही हैं। विश्व को बिना शर्त और एक स्वर में इनका मुकाबला करना होगा।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के राष्ट्र के नाम संदेश के बाद माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर यूजर्स ने अपनी प्रतिक्रिया दी।