नोटबंदी के बाद हो रही परेशानी से इस वक्त शायद ही कोई शख्स अछूता हो। ऐसे में राष्ट्रपति भवन ने भी नोटबंदी के साइड इफेक्ट का सामना किया। इंडियन एक्सप्रेस को जानकारी मिली है कि वित्त मंत्रालय के पास राष्ट्रपति भवन से एक चिट्ठी आई थी। उसमें लिखा गया था कि स्टाफ की सैलरी देने के लिए उन्हें नकद 64.5 लाख रुपए की जरूरत है। चिट्ठी के मिलते ही वित्त मंत्रालय ने फौरन पैसे का इंतजाम करके राष्ट्रपति भवन भेज दिया। गौरतलब है कि मोदी सरकार द्वारा 8 नवंबर को नोटबंदी का एलान किया गया था। बताया गया था कि 30 दिसंबर के बाद से 500 और 1000 रुपए के नोट नहीं चलेंगे। तब से बैंक और एटीएम के बाहर की लाइन खत्म होने का नाम नहीं ले रही। मोदी सरकार द्वारा वक्त वक्त पर लोगों की सहूलियत के हिसाब से अपने फैसलों में बदलाव भी किए जा रहे हैं। ताजा बदलाव के हिसाब से 24 नवंबर (गुरुवार) से लोग बैंक जाकर 500 और 1000 के नोट नहीं बदलवा पाएंगे।

24 नवंबर को जारी बयान के मुताबिक, सरकार ने जिन सेवाओं में पुराने प्रतिबंधित नोटों को जमा कराने की छूट दी है उनमें भी भुगतान केवल 500 रुपए के पुराने नोट के जरिए किया जा सकेगा। वह भुगतान 15 दिसंबर तक ही होगा। यानी 1000 रुपए का नोट कहीं नहीं चलेगा। टोल नाकों पर 3-15 दिसंबर तक टोल का भुगतान 500 रुपए के पुराने नोटों में किया जा सकेगा। इसके अलावा सरकारी स्कूलों की फीस भी पुराने 500 के नोटों के भरी जा सकती है। केंद्रीय भंडार पर भी 500 रुपए के नोटों को चलाया जा सकता है।

देश के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को राष्ट्रपति भवन में दूसरा कार्यकाल नहीं मिलने के साफ संकेत भी मिले रहे हैं। सरकार ने रिटायरमेंट के बाद उनके नए घर का चयन भी कर लिया है। जुलाई 2017 में मुखर्जी का कार्यकाल खत्म हो रहा है। इसके बाद वह एपीजे अब्दुल कलाम रोड पर स्थित 34 नंबर बंगले में रहेंगे। फिलहाल यह बंगले लोकसभा के पूर्व स्पीकर दिवंगत पी संगमा को आवंटित है। जिसे रिटायरमेंट के बाद प्रबण मुखर्जी को दिया जाएगा। साल 2012 में पी संगमा को हराकर प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति बने थे।