पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नोटबंदी के मुद्दे पर नरेन्द्र मोदी सरकार को घेरते हुए राज्यसभा में कहा कि इससे विकास दर दो फीसदी तक गिर सकती है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से इस फैसले को लागू किया गया है, उससे साफ जाहिर होता है कि मोदी सरकार बुरी तरह से फेल हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले से 60 से 65 लोगों की जान चली गई है जबकि आम लोग परेशान हैं लेकिन ये साफ नहीं है इससे फायदे क्या होंगे। उन्होंने कहा, “मैं पूरी जिम्मेदारी से कह सकता हूं कि हम नहीं जानते कि इससे क्या फायदे होंगे। जो लोग गरीब और कमज़ोर हैं उसके लिए ये 50 दिन काफी भारी पड़ेंगे।”

राज्य सभा में जैसे ही मनमोहन सिंह बोलने के लिए खड़े हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उन्हें रोकते हुए पहले विपक्ष को सदन चलने देने की बात कही। इस पर कांग्रेस के सदस्यों ने जेटली को विरोध किया और इसे शर्मनाक करार दिया।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बातों के अहम बिन्दु:

– मनमोहन सिंह ने राज्यसभा में कहा कि मोदी सरकार को आमलोगों की शिकायतों पर गौर करना चाहिए जो लोग पिछले पंद्रह दिनों से रोज बैंकों का चक्कर काट रहे हैं।

-60 से 65 लोगों की मौत डिमोनेटाइजेशन की वजह से हुई है।

-हमारी करेंसी और बैंकिंग सिस्टम से लोगों का भरोसा कम हुआ है।

-प्रधानमंत्री जी ने 50 दिन इंतजार करने को कहा लेकिन किसी गरीब के लिए 50 दिन रुकना नामुमकिन है।

-मनमोहन सिंह ने कहा, मैं प्रधानमंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि क्या वो किसी देश का नाम बताएंगे जहां लोग अपने पैसे बैंक में जमाकर उसे निकालने के लिए इतना परेशान हो रहे हों।

-पूर्व पीएम ने कहा, मैं उम्मीद करता हूं कि प्रधानमंत्री देश के निराश करोड़ों लोगों के लिए कोई व्यवहारिक और कारगर कदम उठाएंगे।

– मनमोहन सिंह ने कहा, देश के कोने-कोने में फैले कॉपरेटिव बैंकों को इस प्रक्रिया से दूर रखा गया है जबकि यह परेशानी कम करने में मददगार साबित हो सकता है।

-पीएम को कुछ सकारात्मक प्रस्ताव के साथ आगे आना चाहिए ताकि विमुद्रीकरण की योजना को अच्छे तरीके से लागू किया जा सके।

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