प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कैबिनेट का विस्तार करने के बाद बनाए गए राज्यमंत्रियों के काम के बारे में उन्हें बता दिया है। इससे पहले तक इस बात की चर्चा थी कि अफ्रीका दौरे से वापस आने के बाद पीएम इन जूनियर मंत्रियों के काम के बारे में फैसला लेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से मिली जानकारी के मुताबिक मोदी चाहते थे कि ये मंत्री उनके मंत्रालय में हो रहे काम को लेकर सजग रहें और ज्यादा भागीदारी दिखाए। अबतक सीनियर मंत्री अपने जूनियर से बिना पूछे ही फैसले लेते आए हैं। इसको ध्यान में रखकर ही यह फैसला लिया गया है। इसलिए हर मंत्रालय के सीनियर मंत्री को अपने जूनियर को अबतक कोई काम ना बताने के लिए कहा गया था।
अब कैसे होगा काम: प्रधानमंत्री द्वारा बनाए गए नियमों के हिसाब से अब संसद के Unstarred प्रश्नों और 8,700 तक की पे ग्रेड वाले कर्मचारियों के सभी प्रशासनिक कार्य कैबिनट मंत्री की जगह उसके मंत्रालय का राज्यमंत्री करेगा। इसके साथ ही मंत्रालय के जुड़े ज्यादातर कागज भी अब राज्य मंत्री से होकर कैबिनेट मंत्री तक जाएंगे। उदाहरण के लिए, जैसे: खाद्य मंत्रालय के सभी बड़े 14 डिवीजन जिसमें कृषि जनगणना, फसलों, सूखा प्रबंधन, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और व्यापार शामिल है उसके सारे कागजात राज्य मंत्री एस आहलूवालिया से होकर कैबिनेट मंत्री राधा मोहन सिंह के पास जाएंगे। ऐसा ही बाकी मंत्रालयों में भी होगा।
कैबिनेट मंत्री क्या करेगा: अब कैबिनेट मंत्री संसदीय मामलों को देखेंगे। एटेंशन मोशन, देखरेख, प्रधानमंत्री के पत्रों का जवाब जैसे काम अब कैबिनेट मंत्री करेंगे।
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क्यों किया गया ऐसा: इससे पहले, 2014 में हुए विस्तार में पीएम मोदी ने कैबिनेट के सीनियर मंत्रियों से उनके जूनियर्स को काम सौंपने के लिए कहा था। लेकिन किए गए काम की जब जानकारी मांगी गई तो कई जूनियर मंत्रियों ने शिकायत की थी कि उन्हें सभी बड़े कार्यक्रमों और फैसलों से दूर रखा जाता था।

