टाटा संस के पूर्व अध्यक्ष साइरस मिस्त्री के करीबी सहयोगी और टाटा संस ग्रुप के भंग किए गए कार्यकारी परिषद के सदस्य प्रोफेसर निर्मल्य कुमार ने खुलासा किया है कि कैसे एक मिनट के अंदर 103 बिलियन डॉलर वाले ग्रुप के अध्यक्ष को पद से हटा दिया गया। लंदन बिजनेस स्कूल के पूर्व प्रोफेसर कुमार ने अपने ब्लॉग में ‘आई जस्ट गॉट फायर्ड’ शीर्षक से आलेख लिखा है। उसमें उन्होंने लिखा है, “24 अक्टूबर की रात 9 बजे के करीब मुझे मेरे एक सहयोगी, जिसके साथ हमने बहुत नजदीक से काम किया है और कई मौकों पर किसी मुद्दे पर हमलोग एक साथ बहस करते थे, का फोन आया। उसने मुझे बताया-‘यह मेरा अप्रिय कर्तव्य है और मुझे यह बताने के लिए कहा गया है कि अब ग्रुप को आपकी सेवा की जरूरत नहीं है।’ मैंने उससे पूछा-‘इसका मतलब यह कि कल सुबह मैं नहीं दिखूं।’ उसका सकारात्मक जबाव आया। जी हां। यह सब एक मिनट के अंदर हो गया।”
कुमार ने लिखा है, “ऐसा नहीं है कि मुझे मेरे काम में दोष की वजह से निकाला गया (मेरा पिछला मूल्यांकन अति उत्तम था)। मैंने हमेशा बेहतर किया। मुझे सिर्फ इसलिए निकाला गया कि मैं उस पद पर था और साइरस के साथ मिलकर अच्छा और व्यापक पैमाने पर काम कर रहा था।” हालांकि, कुमार कहते हैं कि टाटा संस ने एक बयान में उन्हें 29 अक्टूबर को हटाने की बात कही है।
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कुमार ने लिखा है कि 18 साल की उम्र से वो काम कर रहे हैं और पहली बार वो अब बेरोजगार हैं। उन्होंने लिखा है, “30 साल के करियर में मुझे तीन बॉस ने प्रभावित किया है। एक हैं ल्यू स्टर्न जिनके अंडर नॉर्थ वेस्टर्न यूनिवर्सिटी से पीएचडी किया, दूसरे हैं एलबीएस के डीन लॉरा टाइसन और तीसरे आप, धन्यवाद साइरस।”
गौरतलब है कि साइरस मिस्त्री को टाटा ग्रुप के चेयरमैन पद से हटाए जाने से पहले पद छोड़ने को कहा गया था लेकिन मिस्त्री ने इससे इनकार कर दिया था। बताया जाता है कि बोर्ड मीटिंग से ठीक पहले मिस्त्री को पद छोड़ने को कहा गया। मिस्त्री के इनकार के बाद जब मीटिंग में उन्हें हटाने का प्रस्ताव पास किया गया तो साइरस ने इसे अवैध करार दिया। बताया जाता है कि ऐसा कहकर मिस्त्री मीटिंग छोड़कर चले गए। बोर्ड मीटिंग में रतन टाटा को चार महीने के लिए अंतरिम चेयरमैन चुना गया था। साथ ही नए चेयरमैन के लिए कमिटी का गठन भी किया गया।

