NSA Ajit Doval News: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने कहा कि भारत की आजादी बहुत बड़ी कीमत चुकाकर हासिल हुई है। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने अपमान, पीड़ा और मृत्यु का सामना किया। गांव नष्ट किए गए, लोगों को फांसी दी गई और हमारी सभ्यता को गहरा आघात पहुंचा।
विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए एनएसए अजित डोभाल ने कहा, “यह स्वतंत्र भारत हमेशा उतना स्वतंत्र नहीं था जितना अब दिखता है। हमारे पूर्वजों ने इसके लिए महान बलिदान दिए। उन्होंने घोर अपमान सहा और घोर असहायता के दौर का सामना किया। कई लोगों को फांसी की सजा सुनाई गई। हमारे गांवों को जलाया गया। हमारी सभ्यता को नष्ट किया गया। हमारे मंदिरों को लूटा गया और हम मूक दर्शक बनकर असहाय रूप से देखते रहे। यह इतिहास हमें एक चुनौती देता है कि आज भारत के हर युवा के भीतर यह जज्बा होना चाहिए।”
अजित डोभाल ने आगे कहा, “प्रतिशोध शब्द आदर्श नहीं है, लेकिन प्रतिशोध खुद एक शक्तिशाली शक्ति है। हमें अपने इतिहास का बदला लेना होगा। हमें इस देश को उस मुकाम पर वापस लाना होगा जहां हम अपने अधिकारों, अपने विचारों और अपनी मान्यताओं के आधार पर एक महान भारत का निर्माण कर सकें।”
हमने किसी के मंदिर नहीं तोड़े- एनएसए
एनएसए ने कहा, “हमारी सभ्यता अत्यंत विकसित थी। हमने किसी के मंदिर नहीं तोड़े। हम कहीं लूटपाट करने नहीं गए। जब बाकी दुनिया बहुत पिछड़ी हुई थी, तब हमने किसी देश या किसी विदेशी पर हमला नहीं किया। लेकिन हम अपनी सुरक्षा और खुद के लिए खतरों को समझने में विफल रहे। इतिहास ने हमें सिखाया है जब हमने उनके प्रति उदासीनता दिखाई, तो हमें एक सबक मिला। क्या हमने वह सबक सीखा? क्या हम उस सबक को याद रखेंगे? यदि आने वाली पीढ़ियां उस सबक को भूल जाती हैं, तो यह इस देश के लिए सबसे बड़ी त्रासदी होगी।”
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अजीत डोभाल ने कहा, “मैं अपनी जवानी भूल चुका हूं और आपकी जवानी इतनी बदल गई है कि मुझे कई बातें याद भी नहीं हैं। लेकिन एक बात हम दोनों में समान है, जब मैं जवान था और अब, मैंने देखा है कि एक चीज हमेशा आपके साथ रहती है। वह है आपकी निर्णय लेने की क्षमता। भारत निश्चित रूप से विकसित होगा। पीएम मोदी के द्वारा तय की गई स्पीड से। वे समय पर निर्णय लेते हैं और उन निर्णयों को पूर्ण विश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ लागू करते हैं। इसलिए यदि आप विकसित भारत के नेता बनना चाहते हैं, चाहे किसी भी क्षेत्र में।”
हम युद्ध क्यों लड़ते हैं- अजित डोभाल
विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए अजीत डोभाल ने कहा, “आप अपनी इच्छाशक्ति बढ़ा सकते हैं। वही इच्छाशक्ति राष्ट्रीय शक्ति बन जाती है। हम युद्ध क्यों लड़ते हैं? हम मनोरोगी नहीं हैं जिन्हें दुश्मन के शवों, लाशों और कटे अंगों को देखकर संतुष्टि या आनंद मिलता है। युद्ध इसलिए नहीं लड़े जाते। युद्ध किसी देश का मनोबल तोड़ने के लिए लड़े जाते हैं, ताकि वह हमारी इच्छा के अनुसार आत्मसमर्पण कर दे और हमारी शर्तें मान ले, जिससे हम अपनी इच्छित उपलब्धि हासिल कर सकें। राष्ट्र की इच्छाशक्ति के लिए ही युद्ध लड़े जाते हैं।”
कुछ देश दूसरों पर अपनी इच्छा थोपना चाहते हैं- अजित डोभाल
अजित डोभाल ने आगे कहा, “आज भी, हो रहे सभी युद्धों और संघर्षों को देखिए; कुछ देश दूसरों पर अपनी इच्छा थोपना चाहते हैं और इसके लिए वे बल का प्रयोग कर रहे हैं। यदि आप इतने शक्तिशाली हैं कि कोई आपका विरोध नहीं कर सकता, तो आप हमेशा स्वतंत्र रहेंगे। लेकिन यदि आपके पास सब कुछ है लेकिन मनोबल नहीं है, तो आपके सभी हथियार और संसाधन बेकार हो जाएंगे और इसके लिए आपको नेतृत्व की आवश्यकता है। आज हम बहुत भाग्यशाली हैं कि हमारे देश में ऐसा नेतृत्व है। एक ऐसा नेतृत्व जिसने 10 वर्षों में देश को जिस स्थिति में यह था, वहां से लेकर आज जिस स्थिति में यह है, वहां तक का सफर तय करके इसे तेज प्रगति के पथ पर अग्रसर किया है। उनकी प्रतिबद्धता, उनकी मेहनत और उनका पूर्ण समर्पण हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।”
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