असहिष्णुता पर जारी बहस के बीच देश के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) टीएस ठाकुर ने रविवार को कहा कि यह राजनीतिक मुद्दा है। जब तक न्यायपालिका स्वतंत्र है और विधि का शासन है, तब तक डरने की जरूरत नहीं है।
सीजेआइ ने यहां पत्रकारों के साथ अनौपचारिक बातचीत में कहा,‘यह सियासी पहलू है। हमारे यहां विधि का शासन है।
जब तक विधि का शासन है, तब तक स्वतंत्र न्यायपालिका है और जब तक अदालतें अधिकारों व प्रतिबद्धताओं को कायम रखे हुए हैं, मुझे नहीं लगता कि किसी को किसी से डरने की जरूरत है।’ न्यायमूर्ति ठाकुर ने कहा, ‘मैं ऐसे संस्थान का नेतृत्व कर रहा हूं जो विधि के शासन को कायम रखता है। हर नागरिक के अधिकारों की रक्षा की जाएगी। मुझे लगता है, हम समाज के सभी वर्गों के अधिकारों की रक्षा में सक्षम हैं। मेरा संस्थान नागरिकों के अधिकारों को कायम रखने में सक्षम हैं। भारत एक विशाल देश है, हमें किसी से डरने की जरूरत नहीं है। ये सब दृष्टिकोण की बाते हैं। जब तक न्यायपालिका स्वतंत्र है, किसी बात का डर नहीं होना चाहिए।’
हालांकि वे असहिष्णुता पर बहस के राजनीतिक पहलुओं पर टिप्पणी से बचे। उन्होंने कहा, ‘सियासी लोग इसका कैसे उपयोग करते हैं, मैं कुछ नहीं कहना चाहूंगा। लेकिन हम विधि का शासन बनाए रखने और समाज के सभी नागरिकों व सभी धर्मों और संप्रदायों के लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। समाज के किसी वर्ग को कोई डर नहीं है। कुछ अधिकार आतंकवादियों सहित गैर नागरिकों के लिए भी उपलब्ध हैं। वे विधि के शासन के लाभार्थी हैं। उनके खिलाफ कानून के अनुरूप ही सुनवाई हो सकती है। तय प्रक्रिया का पालन किए बगैर फांसी नहीं दी जा सकती।’
सीजेआइ ने असहिष्णुता के मुद्दे और हालिया चर्चाओं से जुड़े सवालों का स्पष्ट रूप से जवाब देते हुए कहा कि जहां तक हमारा सवाल है, हमारे सामने ऐसी बाधाएं नहीं हैं। हममें ऐसे पूर्वाग्रह नहीं हैं। हमारी ऐसी अनिच्छा नहीं है। हम सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं। न्यायमूर्ति ठाकुर ने स्पष्ट किया कि वे किसी खास घटना का जिक्र नहीं कर रहे हैं। यह देश सभी धर्मों का घर रहा है और यहां तक कि जिन लोगों को अन्य देशों में सताया गया वे भी यहां फले-फूले। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि अन्य समाजों में सताए गए लोग यहां आए और फले फूले। हमारे यहां पारसी हैं। उनका योगदान बहुत है। हमारे पास कानूनी विद्वान और उद्योगपति हैं। हमारे पास विधि का शासन कायम रखने वाले एफएस नरीमन और ननी पालकीवाला जैसे लोग हैं। आप उनका योगदान जानते हैं।
बर्दाश्त नहीं किया जाएगा जजों का भ्रष्टाचार
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआइ) न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर ने कहा है कि न्यायाधीशों की पथभ्रष्ट गतिविधियों और भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यक्तियों को नहीं बल्कि संस्थाओं को संदेह का लाभ दिया जाएगा।
न्यायमूर्ति ठाकुर ने रविवार को कहा कि उनके सामने बड़ी चुनौती न्यायपालिका की विश्वसनीयता को बनाए रखना है। उन्होंने कहा, ‘कुछ गलतफहमियां हैं कि क्या व्यवस्था कुछ न्यायाधीशों के आचरण और पथभ्रष्ट गतिविधियों को लेकर सहनशील है। इस धारणा को खत्म करना है।’ सीजेआइ ने यहां पत्रकारों से कहा, ‘न्यायाधीशों का पथभ्रष्ट व्यवहार, रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार कुछ मुद्दे हैं। हम पथभ्रष्ट व्यवहार, रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के प्रति काफी असहनशील होंगे।’ न्यायपालिका के सामने मौजूद चुनौतियों पर सीजेआइ ने कहा, ‘व्यवस्था की सफाई करना आसान नहीं है। लेकिन आप अपराध पर काबू कर सकते हैं। व्यक्तियों को नहीं बल्कि संस्थाओं को संदेह का लाभ दिया जाएगा।’ उन्होंने कहा कि संदिग्ध लोग अपने पक्ष में तर्क दे सकते हैं।
मद्रास हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सीएस कर्णन के कथित पथभ्रष्ट व्यवहार के सवाल पर न्यायमूर्ति ठाकुर ने किसी का नाम लिए बिना कहा, ‘हम इस पर गौर करेंगे और सुधारात्मक कदम उठाएंगे। चाहे कोई भी हो। वह कश्मीर से कन्याकुमारी तक चाहे कोई भी हो।’ उन्होंने कहा कि अंदरूनी प्रक्रियाएं पूरी तरह सही हैं। लेकिन कथित तौर पर दोषी न्यायाधीशों से निपटना ज्यादा अहम है।
कॉलिजियम प्रणाली पर चल रहे विवाद पर सीजेआइ ने कहा, ‘उन्होंने (संविधान पीठ ने) कहा है कि कॉलिजियम व्यवस्था आगे बढ़ सकती है। उन्होंने यह नहीं कहा कि कॉलिजियम को आगे बढ़ना चाहिए। व्यक्तिगत तौर पर मैं फैसले का इंतजार करना चाहूंगा।’ उन्होंने कहा कि वह पीठासीन न्यायाधीशों की राय जानना चाहेंगे कि मुझसे इस पर कैसे काम करने की अपेक्षा की जाती है।
