राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने हाल ही में बिहार के किशनगंज के एक नाबालिग लड़के के बारे में एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया, जिसे हरियाणा के बहादुरगढ़ रेलवे स्टेशन पर उसके पिता से बिछड़ जाने के बाद बंधुआ मजदूरी करने के लिए मजबूर किया गया था। खबरों के मुताबिक, लड़का रेलवे स्टेशन पर पानी लेने के लिए ट्रेन से उतरा लेकिन भारी भीड़ के कारण अपने पिता के पास वापस जाने के लिए ट्रेन में नहीं चढ़ सका। जिसके कारण उसकी ट्रेन छूट गई और आठ महीने तक लड़के को बंधुआ मजदूरी करनी पड़ी। NHRC ने पाया कि उसका बायां हाथ कटा हुआ था।

आयोग ने अगस्त 2025 में द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के आधार पर इस घटना का स्वतः संज्ञान लिया था। अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा और निकाय के अन्य सदस्यों ने जनवरी 2026 में पाया कि आरोपी अनिल कुमार (28) ने 16 साल के नाबालिग लड़के को बहादुरगढ़ रेलवे स्टेशन पर अकेला पाया था। जिसके बाद आरोपी ने उसे कैद कर रख लिया और उसे अपनी डेयरी में काम करने के लिए मजबूर किया।

आरोपी ने लड़के से कराई बंधुआ मजदूरी

आयोग के समक्ष रखी गई पुलिस रिपोर्ट में कहा गया है कि अनिल कुमार ने स्वीकार किया था कि उसने मई 2025 की रात में बहादुरगढ़ रेलवे स्टेशन पर लड़के को रोते हुए देखा था। बाद में उसे पता चला कि लड़का अपने परिवार से अलग हो गया था और उसके पास न तो टिकट था और न ही पैसे। आरोपी ने कथित तौर पर कहा कि उसने लड़के को अपनी डेयरी में काम पर रखने का फैसला किया और स्थिति का फायदा उठाते हुए, लड़के को अपनी बाइक पर डेयरी में ले आया और उसे पशुओं के काम में लगा दिया।

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मशीन से चारा काटते समय कटा नाबालिग का हाथ

अभियुक्त ने आगे बताया कि नाबालिग को दिन के समय जंगल में भैंस चराने के लिए मजबूर किया जाता था। आरोपी ने नाबालिग को कहीं भी जाने की अनुमति नहीं दी और उस पर कड़ी निगरानी रखी। एक बार लड़के ने भागने की कोशिश की पर अनिल ने उसे पकड़ लिया। लगभग दो महीने बाद, जब लड़का मशीन से चारा काट रहा था तो उसका बायां हाथ मशीन में फंस गया और कोहनी तक कट गया।

आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने चारे के साथ लड़के के कटे हुए हाथों के टुकड़ों को भी अपने घर से दूर यमुना नदी में फेंक दिया था। अनिल ने यह भी स्वीकार किया कि उसने लड़के को कोई मेडिकल ट्रीटमेंट नहीं दिया और केवल घर पर कुछ दवाइयाँ दीं। हालांकि, चोट बहुत गंभीर होने के कारण नाबालिग ठीक नहीं हो सका। इसके बाद, आरोपी ने पुलिस के डर से लड़के को छोड़ने का फैसला किया और उसे हरियाणा के पास एक सुनसान जगह पर छोड़ दिया। आरोपी ने लड़के को बाद में और पैसे देने के वादे के साथ 10,000 रुपये दिए थे।

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NHRC ने लिया मामले का संज्ञान

मामले पर संज्ञान लेते हुए एनएचआरसी ने हरियाणा के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर के पुलिस आयुक्त और बिहार के किशनगंज के जिला मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी किए। एनएचआरसी ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि वे सूचित करें कि क्या पीड़ित को कोई मुआवजा दिया गया है। साथ ही उसे विकलांगता प्रमाण पत्र जारी किया गया है या नहीं ताकि पीड़ित विकलांग व्यक्ति अधिनियम, 2016 के लाभ प्राप्त कर सके। इस घटनाक्रम में, हरियाणा राज्य मानवाधिकार आयोग ने पुलिस की जांच की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने उस अपराधी का पता लगाने के लिए ईमानदार प्रयास किए।