राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने गाजियाबाद में हिंडन नदी से लगी हुई अर्थला झील में कचरे का अंबार और अतिक्रमण पर गुरुवार (15 सितंबर) को ध्यान देते हुए केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से मुद्दे पर जवाब मांगा है। एनजीटी के प्रमुख न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, अखिलेश यादव सरकार, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण और अन्य को नोटिस जारी कर उनसे 25 अक्तूबर तक जवाब देने को कहा है। एनजीटी ने एनजीओ स्पेनबायो की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिका में गाजियाबाद की अर्थला झील पर सभी अवैध निर्माण एवं अतिक्रमण हटाने और झील का प्राकृतिक सौंदर्य बहाल करने की मांग की गई है। याचिका में आरोप लगाया कि एक भट्टी और एक अस्पताल झील में अपशिष्ट पदार्थ छोड़ रहे हैं। इसमें कहा गया है कि अर्थला झील पर अतिक्रमण, अवैध निर्माण और अनाधिकृत कब्जे के कारण पर्यावरण को क्षति पहुंच रही है और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। याचिका के अनुसार अर्थला झील में ठोस अपशिष्ट पदार्थ और बायोमेडिकल कचरा डालने व मोहन मिकिन लिमिटेड द्वारा छोड़े जा रहे औद्योगिक अपशिष्ट पदार्थ भूमिगत जल को दूषित कर रहे हैं, झील को तबाह कर रहे हैं जो अपने मूल आकार से घट कर करीब आधा हो गया है।

इलाके के लोगों ने झील पर अतिक्रमण को लेकर गाजियाबाद नगर निगम, जिला मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के समक्ष कई शिकायतें दर्ज करार्इं लेकिन इनमें से किसी ने भी उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। स्पेनबायो का आरोप है कि अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई करने की बजाए गाजियाबाद विकास प्राधिकरण झील के खसरा संख्या 1446 पर एक अंडरपास का अवैध निर्माण कर रहा है और राज्य स्तर पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण से पर्यावरण संबंधी मंजूरी लिए बिना आर्द्रभूमि (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम 2010 व उप्र जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम 1950 की धारा 132 का उल्लंघन करते हुए एलीवेटेड रोड पर दस से अधिक खंभे खड़े किए गए हैं।