भारत में 45 साल पहले आज ही के दिन पहली बार इमरजेंसी लगी थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रात में ही रेडियो के जरिए इमरजेंसी का ऐलान करते हुए विरोधी नेताओं को जेल में बंद कर दिया था। साथ ही लोगों के मौलिक अधिकारों को निरस्त कर दिया गया था। इस पर टीवी एंकर और पत्रकार रजत शर्मा ने गुरुवार को ट्वीट किए। उन्होंने इमरजेंसी के दौर को यादद करते हुए कहा कि जब इमरजेंसी लगी, तब में कॉलेज में था और उम्र सिर्फ 18 साल थी। उन्होंने बताया कि उस दौरान पुलिस ने उनकी बहुत पिटाई की थी, जिसके निशान उनके पैरों पर आज भी हैं। सरकार की वजह से उन्हें कई महीनों जेल में रहना पड़ा था।
रजत शर्मा यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा, “45 साल पहले की 25 जून की काली रात कभी नहीं भूलेगी। इंदिरा गांधी ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए इमर्जेन्सी लगाई। सारे विरोधी नेताओं को जेल भेजा। अख़बारों की आज़ादी छीन ली। जबरन नसबंदियां हुईं। थानों में ज़ुल्म हुए। सब कुछ याद है।”
उन्होंने आगे कहा, “आज के लोग कल्पना भी नहीं कर सकते इमरजेंसी में कैसा ख़ौफ़ था। उस वक्त न प्राइवेट टीवी था,न सोशल मीडिया। लाखों लोग जेल में थे। अखबारों पर सेंसर, अदालतों के गले में फंदा, पुलिस के ज़ुल्म, न बोलने की आजादी, न कोई अधिकार। सब याद है।
रजत शर्मा के इन ट्वीट्स पर ट्रोल्स ने तुरंत ही सोशल मीडिया पर उनकी खिंचाई शुरू कर दी। एक यूजर अजय शर्मा ने लिखा, “सर इमरजेंसी की नेगेटिविटी की जगह बेहतर होता कि आप 83 वर्ल्ड कप विक्ट्री याद कर लेते। सुबह सुबह पॉजिटिव नोट से शुरू करना चाहिए, खैर छोड़ो। आपका एजेंडा कुछ और है।”
एक अन्य यूजर @LaxmiNarayanDi4 ने लिखा, “निजीकरण एक इमरजेंसी की तरह है,जो जल्दी ही देश की समस्त सरकारी नौकरियों को विलुप्त कर देगा। देश में पूंजीपतियों का बोलबाला होगा। देश पूंजीवाद की ओर चला जाएगा अमीर और गरीब केवल दो ही बचेंगे मध्यम वर्ग का पतन हो जाएगा।
ट्विटर पर ही हैंडल @KumarSoyat ने कहा, “वो इमर्जेंसी तो बीत चुकी लेकिन आज के दौर की इमरजेंसी जनता की जान ले रहीं, डालर 75 पार हो गया पेट्रोल नकद पूरे 100 हो गया। बेरोजगार सडकों पर आ गए जीडीपी पानी मांग रहीं,, लोग गरीबी से तंग आकर आत्महत्या कर रहे,, डरपोक मोदी चीन के साथ जुला जुल रहा।”
